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80% दिव्यांग शिक्षिका ने बनाया कमाल: ब्लाइंड बच्चों के लिए 3800 ऑडियो बुक्स तैयार, अब NCERT पैटर्न पर किताबें बना रहीं

 

दुर्ग की शिक्षिका के. शारदा की प्रेरक कहानी: ब्लाइंड बच्चों के लिए 3800 ऑडियो बुक्स, 10 हजार का लक्ष्य

दुर्ग-भिलाई छत्तीसगढ़ के Durg district जिले की शिक्षिका K. Sharda दिव्यांग होने के बावजूद ब्लाइंड बच्चों की पढ़ाई आसान बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। महज डेढ़ साल के छोटे से सफर में उन्होंने ब्लाइंड बच्चों के लिए 3800 से ज्यादा ऑडियो बुक्स तैयार कर ली हैं।

अब शारदा देशभर के ब्लाइंड बच्चों के लिए एनसीईआरटी पैटर्न पर किताबें तैयार करने में जुटी हैं। के. शारदा दुर्ग के खेदामारा स्थित शासकीय स्कूल में शिक्षिका हैं। साल 2024 में उन्हें राष्ट्रपति के हाथों National Teacher Award से सम्मानित किया जा चुका है।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने के बाद शारदा ब्लाइंड बच्चों से जुड़ीं। उन्होंने तय किया कि ब्लाइंड बच्चों के लिए कुछ खास करना है। इंटरनेट की मदद से उन्होंने सीखा कि ऑडियो बुक कैसे बनाई जाती है और इसके बाद उन्होंने ऑडियो बुक बनाना शुरू कर दिया।

80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद नहीं मानी हार

शिक्षिका के. शारदा करीब 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपने जीवन की चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए समाज के लिए प्रेरणादायक काम किया है। पहली से आठवीं तक की पढ़ाई उन्होंने बीएसपी स्कूल में की थी। उस समय स्कूल की अधिकतर कक्षाएं ऊपरी मंजिल पर थीं। वहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़ना उनके लिए काफी मुश्किल होता था।

दिव्यांगता के कारण रोजाना इस परेशानी का सामना करना पड़ता था। आखिरकार उन्हें वह स्कूल छोड़ना पड़ा। बाद में उन्होंने सरकारी स्कूल में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई सरकारी कॉलेज से की और वर्ष 2009 में शासकीय स्कूल में शिक्षिका के रूप में उनकी नियुक्ति हो गई।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के बाद शुरू हुआ नया मिशन

साल 2024 में राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने के बाद शारदा को ब्लाइंड बच्चों के एक समूह से जोड़ा गया। उस समय तक उन्हें ब्लाइंड बच्चों की पढ़ाई या उनकी जरूरतों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। पहली बार जब वे इन बच्चों से जुड़ीं, तब उन्हें पता चला कि ब्लाइंड बच्चे पढ़ाई के लिए ऑडियो फॉर्मेट का ज्यादा उपयोग करते हैं। ब्रेल किताबों के बारे में उन्होंने पहले सुना जरूर था, लेकिन उसे करीब से देखने का मौका उन्हें पहली बार मिला।

इसके बाद उन्होंने तय किया कि वे ब्लाइंड बच्चों के लिए पढ़ाई को आसान बनाने का काम करेंगी।

इंटरनेट से सीखा ऑडियो बुक बनाना

ब्लाइंड बच्चों की मदद करने के लिए शारदा ने इंटरनेट की मदद ली। उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से सीखा कि ऑडियो बुक कैसे बनाई जाती है।

25 अक्टूबर 2024 को उन्होंने ऑडियो बुक बनाना शुरू किया। आज महज डेढ़ साल के भीतर उन्होंने 3800 से ज्यादा ऑडियो बुक्स तैयार कर ली हैं। उनका लक्ष्य 10 हजार ऑडियो बुक्स तैयार करना है।

ये ऑडियो बुक्स कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए तैयार की जा रही हैं। इनमें अलग-अलग विषयों की पढ़ाई के साथ-साथ कहानियां, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री भी शामिल है।

छत्तीसगढ़ी और हल्बी भाषा में भी तैयार की सामग्री

शारदा द्वारा तैयार की गई ऑडियो बुक्स में छत्तीसगढ़ी भाषा की सामग्री भी शामिल है। इसके साथ ही हल्बी भाषा में भी कंटेंट तैयार किया गया है।

ये ऑडियो बुक्स न केवल ब्लाइंड बच्चों के लिए उपयोगी हैं, बल्कि सामान्य छात्र भी इनका लाभ उठा सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के क्रांतिकारियों की कहानी पढ़ेगा पूरा देश

अब तक शारदा की किताबें छत्तीसगढ़ बोर्ड के पैटर्न पर तैयार होती थीं। लेकिन राज्यपाल के सुझाव के बाद उन्होंने एनसीईआरटी पैटर्न पर ऑडियो बुक्स तैयार करना शुरू कर दिया है।

इससे छत्तीसगढ़ के इतिहास, यहां के वीरों और क्रांतिकारियों की कहानी देशभर के छात्रों तक पहुंचेगी और पूरे देश के विद्यार्थी छत्तीसगढ़ को बेहतर तरीके से जान सकेंगे।

25 से ज्यादा किताबें लिख चुकी हैं शारदा

के. शारदा का काम सिर्फ ऑडियो या ब्रेल किताबों तक सीमित नहीं है। वे अब तक 25 से ज्यादा किताबें लिख चुकी हैं।

इन किताबों में गणित, नैतिक कहानियां और पढ़ाई को आसान बनाने वाली सामग्री शामिल है। उनकी कुछ किताबों का अंग्रेजी और छत्तीसगढ़ी भाषा में अनुवाद भी हो चुका है।

इसके अलावा उन्होंने हल्बी भाषा में भी एक किताब लिखी है, जो बस्तर क्षेत्र के बच्चों के लिए तैयार की गई है। अब वे गोढ़ी भाषा में भी नई किताब तैयार कर रही हैं।


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