05 मार्च 2026 रायपुर छ.ग.
सड़क किसी भी क्षेत्र के विकास की रीढ़ मानी जाती है। बेहतर सड़कें न केवल आवागमन को सुगम बनाती हैं बल्कि व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास की दिशा भी तय करती हैं। यही कारण है कि सरकारें और जनप्रतिनिधि अक्सर अपने विकास कार्यों में सड़क निर्माण को प्रमुख उपलब्धि के रूप में गिनाते हैं।
लेकिन जब वही सड़कें कुछ ही समय में जर्जर हो जाएं, गड्ढों से भर जाएं और लोगों का चलना तक मुश्किल हो जाए, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है।
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां मुंगेली-बिलासपुर मुख्य मार्ग के तखतपुर से बरेला तक का हिस्सा इन दिनों बेहद जर्जर हालत में पहुंच चुका है।
कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं बदली स्थिति
क्षेत्र की खराब सड़कों को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने संबंधित विभागों को जर्जर सड़कों की मरम्मत और सुधार के निर्देश दिए थे।
लोगों को उम्मीद थी कि अब स्थिति में सुधार होगा और खराब सड़कों से राहत मिलेगी।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद कुछ समय तक हलचल जरूर दिखाई दी, लेकिन वास्तविक सुधार के बजाय केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं। कई जगहों पर गड्ढों में थोड़ी मिट्टी या गिट्टी डालकर काम पूरा दिखा दिया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सड़क फिर उसी हालत में पहुंच गई।
तखतपुर से बरेला तक सड़क बनी मुसीबत
यदि इस समस्या की वास्तविक तस्वीर देखनी हो तो मुंगेली-बिलासपुर रोड पर तखतपुर से बरेला तक के हिस्से को देखना ही काफी है। यह मार्ग इन दिनों इतनी खराब स्थिति में पहुंच चुका है कि यहां से गुजरना लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कई जगहों पर सड़क की डामर परत पूरी तरह उखड़ चुकी है और नीचे की गिट्टी बाहर आ गई है। बड़े-बड़े गड्ढों और टूटी सतह के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए तो यह मार्ग किसी खतरे से कम नहीं है। अचानक गड्ढे आ जाने से कई बार वाहन असंतुलित हो जाते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
धूल से नहा रहे लोग
सड़क की खराब स्थिति के कारण यहां एक और बड़ी समस्या सामने आ रही है — धूल का गुबार।
जब भी इस सड़क से भारी वाहन गुजरते हैं, तो धूल का बादल पूरे इलाके में फैल जाता है। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि दिनभर सड़क से उड़ने वाली धूल के कारण ऐसा लगता है जैसे लोग धूल से नहा रहे हों। दुकानदारों को बार-बार अपने सामान को साफ करना पड़ता है और राहगीरों को सांस लेने तक में परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धूल के कारण एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं।
पैदल चलना भी हुआ मुश्किल
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। गड्ढों और उखड़ी सड़क के कारण वाहन चालकों को बेहद धीमी गति से चलना पड़ता है। कई बार जाम जैसी स्थिति भी बन जाती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो आने वाले समय में यह मार्ग पूरी तरह खतरनाक हो सकता है।
विकास के दावे बनाम जमीनी हकीकत
क्षेत्र में स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि अक्सर विकास कार्यों का बखान करते नजर आते हैं। मंचों से शासकीय योजनाओं की लंबी सूची गिनाई जाती है और सुशासन की बात कही जाती है। लेकिन जब इन दावों को जमीन पर देखा जाता है, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर केवल शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह जरूर सच है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों तक सड़कें पहुंची हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
आधी राशि में पूरा काम?
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई निर्माण कार्यों में स्वीकृत राशि का पूरा उपयोग ही नहीं किया जाता। बताया जाता है कि जिस सड़क के निर्माण के लिए जितनी राशि स्वीकृत होती है, उसका आधे से भी कम खर्च करके काम पूरा कर दिया जाता है। ऐसे में यह उम्मीद करना कि सड़क मजबूत और टिकाऊ होगी, शायद वास्तविकता से दूर की बात है।
स्तरहीन निर्माण की खबरें लगातार
पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया, समाचार चैनलों और अखबारों में भी स्तरहीन निर्माण की कई खबरें सामने आ चुकी हैं। कई जगहों पर सड़क बनने के कुछ ही महीनों बाद उखड़ गई। कहीं गड्ढे बन गए, तो कहीं पूरी सड़क की सतह ही टूट गई। इसके बावजूद स्थिति में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आ रहा।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
सबसे हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर समस्या के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही। जहां एक ओर मंचों से विकास के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत लोगों की परेशानी को साफ-साफ बयां कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क की स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
जनता पूछ रही सवाल
अब जनता यह सवाल पूछ रही है —
👉 क्या विकास केवल भाषणों और कागजों तक सीमित रहेगा?
👉 क्या तखतपुर से बरेला तक की जर्जर सड़क कभी सुधरेगी?
👉 क्या कोर्ट के आदेश का सही मायने में पालन होगा?
क्योंकि सड़क केवल एक रास्ता नहीं होती —
यह लोगों की जिंदगी, रोजमर्रा की जरूरतों और विकास की पहचान भी होती है।
निष्कर्ष
मुंगेली-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर तखतपुर से बरेला तक की जर्जर सड़क आज क्षेत्र की बड़ी समस्या बन चुकी है।
कोर्ट के आदेश के बावजूद यदि सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं होता, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब जरूरत है पारदर्शिता और जवाबदेही की।
सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कहीं लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
क्योंकि आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या जनता को सुरक्षित और बेहतर सड़कें मिलेंगी या फिर विकास केवल दावों में ही सीमित रह जाएगा?

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