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विश्रामपुरी सहकारी बैंक में किसानों की ‘पेशी’

 धान भुगतान में भारी अव्यवस्था,घंटों लाइन—फिर भी नहीं मिलती राहत

23 फरवरी 2026/गम्हरी। हिमांशु बघेल 

बैंक में जमा अपनी ही मेहनत की कमाई निकालना हर खाताधारक का अधिकार है, लेकिन बड़ेराजपुर ब्लॉक के विश्रामपुरी स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, जगदलपुर की विश्रामपुरी शाखा में किसानों के लिए यह अधिकार किसी परीक्षा से कम नहीं रह गया है।

धान बिक्री के बाद भुगतान राशि निकालने के लिए किसानों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है। कई किसान सुबह 5 बजे ही घर से निकलकर बैंक पहुंच जाते हैं, लेकिन पूरे दिन इंतजार के बाद भी भुगतान मिलेगा या नहीं—यह तय नहीं होता।

30–40 किलोमीटर दूर से पहुंच रहे किसान

धान बेचने के करीब 15 दिन बाद बैंक में भुगतान प्रक्रिया शुरू होती है। क्षेत्र के दूरस्थ गांवों से किसान 30 से 40 किलोमीटर की दूरी तय कर विश्रामपुरी पहुंचते हैं।

“पहले आओ, पहले पाओ” की स्थिति के कारण किसान सुबह 8 बजे से ही बैंक के बाहर लाइन में लग जाते हैं।

किसानों का कहना है कि जल्दबाजी में कई बार वे नाश्ता और भोजन तक नहीं कर पाते। बैंक का समय सुबह 11 बजे से शुरू होता है, लेकिन कंप्यूटर सिस्टम धीमा होने का हवाला देकर भुगतान प्रक्रिया बेहद सुस्त रहती है। कई बार शाम 7–8 बजे तक भुगतान चलता है, जिससे किसानों को रात 9 बजे घर लौटना पड़ता है।

देर रात सफर का जोखिम, रिश्तेदारों के यहां रुकने की मजबूरी

देर शाम भुगतान मिलने पर बड़ी नकदी लेकर मोटरसाइकिल से लंबी दूरी तय करना जोखिम भरा हो जाता है। मजबूरी में कई किसानों को विश्रामपुरी या आसपास के रिश्तेदारों के यहां रुकना पड़ता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त खर्च और असुविधा झेलनी पड़ती है।

सप्ताह में केवल एक दिन भुगतान,राशि भी सीमित

बैंक प्रबंधन द्वारा गांववार भुगतान के लिए सप्ताह में केवल एक दिन तय किया गया है। उसी दिन संबंधित गांव के किसानों को भुगतान मिलता है।

इतना ही नहीं, एक बार में केवल 10 से 20 हजार रुपये तक ही नकद भुगतान किया जा रहा है।

किसानों का कहना है कि शादी, बीमारी या अन्य आपात स्थिति में भी निर्धारित दिन के अलावा भुगतान नहीं किया जाता, जिससे गंभीर आर्थिक व मानसिक संकट उत्पन्न हो रहा है।

हर साल वही समस्या, समाधान अब तक नहीं

ग्रामीणों के अनुसार धान खरीदी के बाद हर वर्ष यही स्थिति बनती है। कई बार शिकायत, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम तक हो चुके हैं, लेकिन बैंक व्यवस्था में कोई स्थायी सुधार नहीं किया गया।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी चिंता बरकरार

प्रदेश सरकार द्वारा धान की अंतर राशि एकमुश्त किसानों के खातों में जमा करने की घोषणा से उम्मीद तो जगी है, लेकिन मौजूदा भुगतान व्यवस्था को देखते हुए किसानों में चिंता भी बनी हुई है। किसानों का कहना है कि बड़ी राशि आने के बाद भी सीमित भुगतान के कारण उन्हें बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ेंगे।

सवालों के घेरे में बैंक की कार्यप्रणाली

  • क्या बैंक में स्टाफ की भारी कमी है?
  • क्या तकनीकी संसाधनों का आधुनिकीकरण संभव नहीं?
  • क्या डिजिटल या वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती?

जब तक इन सवालों का समाधान नहीं होगा, किसानों को अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए लाइन में खड़े रहना पड़ेगा।

किसानों की प्रमुख मांगें

  • भुगतान व्यवस्था में तत्काल सुधार
  • सभी गांवों के किसानों को प्रतिदिन भुगतान
  • पर्याप्त नकदी व स्टाफ की तैनाती
  • डिजिटल व वैकल्पिक भुगतान प्रणाली को बढ़ावा

किसानों का दर्द साफ शब्दों में—“हमने धान बेचा है, भीख नहीं मांगी। अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए इतनी परेशानी क्यों?”

अब देखना यह है कि प्रशासन और बैंक प्रबंधन इस गंभीर समस्या पर कब ठोस कदम उठाते हैं।


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