सुकमा। महंगाई और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच वर्षों से कम मानदेय पर काम कर रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अब अपने अधिकारों के लिए आंदोलन की राह पर हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता सहायिका संघ के आह्वान पर प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारियां तेज हो गई हैं। लंबित मांगों के निराकरण को लेकर संघ ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल निर्णय की मांग की है।
संघ की जिला अध्यक्ष दुलारी धाम ने कहा कि देश को आजाद हुए दशकों बीत चुके हैं, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब तक न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और शासकीय कर्मचारी का दर्जा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से होता है, इसके बावजूद उनके हितों की अनदेखी की जा रही है।
मानदेय बेहद कम, जिम्मेदारियां अपार
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 6,000 रुपये तथा सहायिकाओं को 2,210 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में अत्यंत अपर्याप्त है।
संघ का कहना है कि पोषण आहार वितरण, टीकाकरण अभियान, मातृ-शिशु स्वास्थ्य देखभाल, प्री-स्कूल शिक्षा, सर्वेक्षण कार्य, चुनाव ड्यूटी सहित अनेक शासकीय जिम्मेदारियां कार्यकर्ताओं के कंधों पर हैं, लेकिन उन्हें समुचित मानदेय और सुरक्षा नहीं मिल रही।
संघ की प्रमुख मांगें
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देकर नियमित किया जाए।
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कार्यकर्ताओं का मानदेय 26,000 रुपये तथा सहायिकाओं का 22,100 रुपये प्रतिमाह किया जाए।
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वृद्धावस्था पेंशन, समूह बीमा, दुर्घटना बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा योजना लागू की जाए।
26-27 फरवरी को हड़ताल, 9 मार्च से अनिश्चितकालीन आंदोलन
संघ ने घोषणा की है कि 26 और 27 फरवरी 2026 को प्रदेशभर में आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखकर कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो 9 मार्च 2026 से रायपुर में लगभग एक लाख कार्यकर्ता और सहायिकाएं अनिश्चितकालीन आंदोलन तथा विधानसभा घेराव करेंगी।
सरकार पर अनदेखी का आरोप
संघ का आरोप है कि बजट 2026-27 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हितों की अनदेखी की गई है, जिससे प्रदेशभर में आक्रोश व्याप्त है। सुकमा जिले में भी आंदोलन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। विभिन्न परियोजना क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर रणनीति बनाई जा रही है और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल होने के लिए सक्रिय हैं।

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