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कोकोड़ी मक्का प्रोसेसिंग प्लांट के 40 से अधिक कर्मचारियों को नहीं मिला एक माह का वेतन

 प्रबंधन पर वेतन रोकने का आरोप, मजदूरों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन — आर्थिक संकट गहराया

कोंडागांव

जिले के कोकोड़ी स्थित मां दंतेश्वरी मक्का प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) प्लांट में कार्यरत 40 से अधिक कर्मचारियों को पिछले एक माह से वेतन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। वेतन लंबित होने से मजदूरों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों ने प्लांट प्रबंधन पर जानबूझकर वेतन रोकने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन मजदूरों को काम छोड़कर जाने से रोकने के उद्देश्य से उनका एक माह का वेतन रोके हुए है। मजदूरों का कहना है कि वे नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे थे, लेकिन अचानक प्लांट बंद होने और वेतन नहीं मिलने से उनकी स्थिति बेहद दयनीय हो गई है।

बताया जा रहा है कि प्लांट में कार्यरत कई मजदूर अन्य जिलों से आकर यहां काम कर रहे हैं, जिनके लिए वेतन ही जीवनयापन का एकमात्र साधन है। वेतन नहीं मिलने से मजदूरों को किराया, भोजन, बच्चों की पढ़ाई और परिवार के दैनिक खर्चों को पूरा करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मजदूर आर्थिक तंगी के कारण मानसिक तनाव में भी हैं।

ग्रामीणों के विरोध के बाद प्लांट हुआ सील

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व कोकोड़ी गांव में स्थित इस मक्का प्रसंस्करण प्लांट से निकलने वाली बदबू और अपशिष्ट को लेकर ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। आक्रोशित ग्रामीणों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नाराजगी जताई थी, जिसके दौरान तोड़फोड़ की घटना भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए प्लांट के संचालन को बंद कर उसे सील कर दिया था।

फैक्ट्री बंद होने के बाद से कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है और अब तक प्रबंधन द्वारा लंबित वेतन जारी नहीं किया गया है। इससे कर्मचारियों में आक्रोश और असंतोष बढ़ता जा रहा है।

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, वेतन जारी करने की मांग

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सभी कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपना लंबित वेतन तत्काल जारी कराने की मांग की है। कर्मचारियों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि यदि फैक्ट्री का संचालन लंबे समय तक बंद रहता है, तो मजदूरों के लिए वैकल्पिक रोजगार या राहत की उचित व्यवस्था की जाए।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

प्रशासन की भूमिका पर टिकी मजदूरों की उम्मीदें

फिलहाल इस पूरे मामले में मजदूरों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं। मजदूरों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान करेगा, ताकि उन्हें उनका हक मिल सके और उनके परिवारों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके।

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