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बलौदाबाजार में झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक में गर्भवती महिला की मौत, अवैध दवाइयों और गांजा बरामद

मृतक महिला 


01 फरवरी 2026,जिला-बलौदाबाजार

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां बिना मेडिकल डिग्री के इलाज कर रहे एक झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक में 4 महीने की गर्भवती महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन ने क्लिनिक को सील कर दिया है। जांच के दौरान भारी मात्रा में अवैध दवाइयां और गांजा बरामद हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

मृतका इंदु साहू (उम्र लगभग 24 वर्ष) अपने पति अजय साहू के साथ पलारी थाना क्षेत्र के छेरकाडीह जारा गांव में रहती थी। वर्ष 2022 में उनकी शादी हुई थी और उनका ढाई साल का एक बेटा है। इंदु दूसरी बार गर्भवती थीं और लगभग 4 महीने का गर्भ था।

गुरुवार को उन्हें सर्दी-खांसी और सीने में दर्द की शिकायत हुई। सामान्य बीमारी समझकर वे गांव में ही इलाज कराने चली गईं। गांव में जयंत साहू नामक व्यक्ति पिछले कई वर्षों से क्लिनिक संचालित कर रहा था। बताया जा रहा है कि वह वर्तमान में गांव का सरपंच भी है।

डॉक्टर के पास पहुंची, फिर बिगड़ी तबीयत

परिजनों के अनुसार, इंदु पहली बार क्लिनिक पहुंची तो डॉक्टर मौजूद नहीं था। कुछ देर बाद जानकारी मिली कि वह लौट आया है, तो इंदु दोबारा इलाज के लिए पहुंची।

करीब 15 से 20 मिनट तक वह क्लिनिक में रही। इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इंजेक्शन लगाने के बाद उन्हें उल्टियां शुरू हो गईं और वे चक्कर खाकर गिर पड़ीं। कुछ देर के लिए होश आया, फिर दोबारा अचेत हो गईं।

स्थिति गंभीर होते देख उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी ले जाया गया, लेकिन वहां ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी।

झोलाछाप doctar

नाक से झाग और खून निकलने की बात

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, महिला के नाक से झाग और खून निकल रहा था। इस स्थिति ने मामले को और संदिग्ध बना दिया। हालांकि पोस्टमॉर्टम न होने के कारण मौत के वास्तविक कारण का आधिकारिक खुलासा नहीं हो सका है।

बिना पोस्टमॉर्टम अंतिम संस्कार

अस्पताल प्रशासन ने शव का पोस्टमॉर्टम कराने की सलाह दी, लेकिन परिजनों ने लिखित आवेदन देकर पोस्टमॉर्टम से इनकार कर दिया। लगभग 4 घंटे तक विचार-विमर्श के बाद शाम को शव उन्हें सौंप दिया गया और उसी दिन अंतिम संस्कार कर दिया गया।

इस मामले में पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

17–20 साल से चला रहा था क्लिनिक

जांच के दौरान आरोपी जयंत साहू ने स्वीकार किया कि उसके पास कोई मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री नहीं है। वह पिछले 17 से 20 वर्षों से गांव में इलाज कर रहा था।

राजस्व, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने क्लिनिक पर छापा मारा और उसे सील कर दिया। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में प्रतिबंधित और अवैध दवाइयां बरामद की गईं। इतना ही नहीं, क्लिनिक से गांजा भी मिलने की पुष्टि हुई है।

प्रशासन की कार्रवाई

नायब तहसीलदार पंकज बघेल ने बताया कि आरोपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है कि वह किस आधार पर बिना डिग्री के चिकित्सा कार्य कर रहा था।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जिन दवाइयों का उपयोग किया जा रहा था, वे केवल प्रशिक्षित और पंजीकृत डॉक्टर ही लिख सकते हैं। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल

यह घटना एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों के नेटवर्क पर सवाल खड़े करती है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और जागरूकता के अभाव में ग्रामीण अक्सर बिना जांच-परख के ऐसे लोगों से इलाज कराते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की दवा या इंजेक्शन केवल योग्य स्त्रीरोग विशेषज्ञ या पंजीकृत डॉक्टर की देखरेख में ही लिया जाना चाहिए। गलत दवा या एलर्जी की प्रतिक्रिया जानलेवा साबित हो सकती है।

कानूनी पहलू

बिना मेडिकल डिग्री इलाज करना भारतीय कानून के तहत दंडनीय अपराध है। यदि जांच में लापरवाही या अवैध गतिविधि साबित होती है तो आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हो सकता है।

हालांकि इस मामले में पोस्टमॉर्टम नहीं होने के कारण कानूनी प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो सकती है। फिर भी अवैध दवाइयों और मादक पदार्थ की बरामदगी अपने आप में गंभीर अपराध है।

समाज के लिए सबक

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है।

✔ गर्भावस्था में किसी भी छोटी बीमारी को हल्के में न लें
✔ केवल सरकारी या पंजीकृत निजी अस्पताल में ही इलाज कराएं
✔ डॉक्टर की डिग्री और पंजीकरण की पुष्टि करें
✔ संदिग्ध गतिविधि दिखे तो प्रशासन को सूचित करें

निष्कर्ष

बलौदाबाजार की यह घटना कई सवाल छोड़ गई है — क्या स्वास्थ्य विभाग को पहले जानकारी नहीं थी? इतने वर्षों तक बिना डिग्री क्लिनिक कैसे चलता रहा? और सबसे बड़ा सवाल, क्या समय रहते सख्त कार्रवाई होती तो एक गर्भवती महिला की जान बच सकती थी?

फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा है और गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी।

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