23 फरवरी 2026/रायपुर।
ग्राम टेकरी, थाना मुजगहन क्षेत्र की भूमि को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित किशोर कुमार शुक्ला ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने आपराधिक षड्यंत्र कर फर्जी वसीयत तैयार कर जमीन का अवैध पंजीयन और नामांतरण कराने का प्रयास किया, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
📌 पीड़ित का परिचय
पीड़ित किशोर कुमार शुक्ला, पिता स्वर्गीय रामखिलावन शुक्ला, उम्र लगभग 47 वर्ष,
मूल निवासी – ग्राम एवं पोस्ट टेकरी, थाना मुजगहन, जिला रायपुर
वर्तमान पता – मकान क्रमांक G-13, लोक निर्माण विभाग कॉलोनी, राजभवन के पास, सिविल लाइन, रायपुर।
🔍 क्या है पूरा मामला
पीड़ित के अनुसार, सुरेश दुबे उर्फ करप्शन उर्फ दलाल, निवासी ग्राम टेकरी, के माध्यम से उन्होंने ग्राम टेकरी स्थित खसरा नंबर 488/3, रकबा 0.2390 हेक्टेयर भूमि को श्रीमती लता मिश्रा, निवासी संतोषी नगर, रायपुर से खरीदने का सौदा तय किया था।
इस सौदे के तहत प्रति एकड़ 7 लाख 51 हजार रुपये की दर से जमीन खरीदने पर सहमति बनी और ₹1,01,000 नगद दो गवाहों के समक्ष अग्रिम राशि दी गई। इसके बाद 31 मार्च 2022 को जिला न्यायालय परिसर रायपुर में विधिवत इकरारनामा संपादित किया गया।
इकरारनामे में यह उल्लेख किया गया था कि संबंधित भूमि स्वर्गीय जानकी बाई के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है और वारिसान हक से नामांतरण कराकर भूमि का पंजीयन पीड़ित के पक्ष में कराया जाएगा।
⏳ पंजीयन में टालमटोल और संदेह
पीड़ित का कहना है कि इकरारनामा के बाद शेष राशि का भुगतान करने के बावजूद भूमि पंजीयन को लगातार टालते रहे। कभी स्वास्थ्य खराब होने तो कभी अन्य बहानों का हवाला दिया गया। इस दौरान भूमि की मूल ऋण पुस्तिका भी पीड़ित को सौंप दी गई, जिससे उन्हें भरोसा रहा कि पंजीयन शीघ्र होगा।
⚠️ फर्जी वसीयत का आरोप
पीड़ित का आरोप है कि बाद में यह सामने आया कि स्वर्गीय जानकी बाई की मृत्यु 13 अगस्त 2018 को हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2024 में दिनांक 04 दिसंबर 2017 की एक कथित वसीयत तैयार करवाई गई, जिसे नोटरी बी.के. तिवारी, रायपुर से प्रमाणित कराया गया।
पीड़ित का कहना है कि यदि ऐसी कोई वसीयत पहले से मौजूद होती, तो उसका उल्लेख 31 मार्च 2022 के इकरारनामे में किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि वसीयत बाद में कूट रचित की गई।
🧾 अवैध पंजीयन और नामांतरण का प्रयास
आरोप है कि इस कथित फर्जी वसीयत के आधार पर स्वप्निल दुबे उर्फ विक्की दुबे, पिता अशोक दुबे, ने भूमि का 26 जून 2024 को अपने नाम पंजीयन करा लिया, जबकि उन्हें पहले से भूमि सौदे की पूरी जानकारी थी।
इसके बाद तहसीलदार खोरपा/अभनपुर के समक्ष नामांतरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। जब नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान इश्तहार जारी हुआ, तब पीड़ित को पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली।
🏛️ प्रशासन के समक्ष आपत्ति
पीड़ित ने तत्काल तहसीलदार खोरपा/अभनपुर, जिला रायपुर के समक्ष लिखित आपत्ति प्रस्तुत कर नामांतरण न किए जाने की मांग की। इसके बावजूद आरोपियों द्वारा नामांतरण के प्रयास लगातार जारी बताए जा रहे हैं।
इतना ही नहीं, श्रीमती लता मिश्रा द्वारा मूल ऋण पुस्तिका गुम होने का हवाला देकर द्वितीय ऋण पुस्तिका जारी कराने का आवेदन भी प्रस्तुत किया गया है।
⚖️ कार्रवाई की मांग
पीड़ित किशोर कुमार शुक्ला ने प्रशासन से मांग की है कि
सुरेश दुबे उर्फ करप्शन उर्फ दलाल, लता मिश्रा, स्वप्निल उर्फ विक्की दुबे एवं गुलाल धृतलहरे के विरुद्ध
➡️ आपराधिक षड्यंत्र
➡️ फर्जी वसीयत तैयार करना
➡️ धोखाधड़ी
➡️ आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न
जैसे गंभीर आरोपों में अपराध दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
🔚 निष्कर्ष
यह मामला न केवल जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी का है, बल्कि राजस्व प्रक्रिया के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेजों के सहारे संपत्ति हड़पने के प्रयास का गंभीर उदाहरण भी सामने लाता है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जांच एजेंसियां इस प्रकरण में क्या रुख अपनाती हैं।


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