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छत्तीसगढ़ में अपराध और राजनीति का रिश्ता? दुर्ग की अफीम खेती से फिर उठे बड़े सवाल


 छत्तीसगढ़ में जब भी कोई बड़ा अपराध सामने आता है, तो उसके साथ एक सवाल जरूर खड़ा हो जाता है — क्या अपराध और राजनीति के बीच कोई संबंध है?

ताजा मामला सामने आया है दुर्ग जिले से, जहां खेतों में अवैध अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद पूरे प्रदेश में चर्चा तेज हो गई है। जांच में सामने आया कि इस मामले में एक स्थानीय राजनीतिक नेता का नाम भी जुड़ रहा है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

बताया जा रहा है कि खेतों में दूसरी फसल की आड़ में अफीम उगाई जा रही थी। जब यह मामला उजागर हुआ तो इलाके में सनसनी फैल गई। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े अपराध के मामले में राजनीतिक कनेक्शन की चर्चा हुई हो।

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां जमीन घोटाला, अवैध खनन, नशे का कारोबार या अन्य गंभीर अपराधों में किसी न किसी राजनीतिक व्यक्ति का नाम चर्चा में आया।

कभी आरोप सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर लगे, तो कभी विपक्ष से जुड़े लोगों पर सवाल उठे। इससे एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या राजनीति की आड़ में अपराध को संरक्षण मिल रहा है।

दुर्ग में सामने आए इस मामले के बाद विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि कानून सबके लिए बराबर है और दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी अपराध में राजनीतिक प्रभावशाली लोगों का नाम सामने आता है, तो क्या जांच पूरी पारदर्शिता से हो पाती है?

और क्या ऐसी घटनाएं राजनीति और अपराध के बढ़ते गठजोड़ की ओर इशारा करती हैं?

दुर्ग की अफीम खेती का मामला केवल एक अवैध फसल का मामला नहीं है, बल्कि यह उस बड़ी बहस को भी सामने ला रहा है जिसमें जनता जवाब चाहती है —

क्या राजनीति को अपराध से पूरी तरह अलग किया जा सकेगा?

अब नजर जांच एजेंसियों पर है, जो इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।


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