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AdSense का जो verification code लगाया है, उसे साइट से हटाना नहीं है। सोलर-बायोगैस प्लांट के लिए 1.50 लाख सब्सिडी मिलेगी: कर्मचारी चयन मंडल बनेगा, परीक्षा में नकल रोकने नया कानून, धर्मांतरण संशोधन विधेयक प्रारूप को मंजूरी
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सोलर-बायोगैस प्लांट के लिए 1.50 लाख सब्सिडी मिलेगी: कर्मचारी चयन मंडल बनेगा, परीक्षा में नकल रोकने नया कानून, धर्मांतरण संशोधन विधेयक प्रारूप को मंजूरी

 

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई छत्तीसगढ़ कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में कुल 10 अलग-अलग प्रस्तावों पर मुहर लगी। इनमें सोलर और बायोगैस संयंत्रों के लिए सब्सिडी देने का फैसला, परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए नया कानून लाने का निर्णय और धर्मांतरण संशोधन विधेयक 2026 के प्रारूप को मंजूरी शामिल है।

सरकार ने यह भी तय किया है कि राज्य में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का गठन किया जाएगा, जो तकनीकी और गैर-तकनीकी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा और चयन प्रक्रिया आयोजित करेगा।

कैबिनेट के फैसले के अनुसार राज्य में सोलर और बायोगैस ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से 1.50 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और लोगों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और किसानों को भी फायदा मिलने की संभावना है।

इसके अलावा राज्य सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती नकल और पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए नया कानून लाने का निर्णय लिया है। इस कानून के तहत परीक्षा में नकल कराने, पेपर लीक करने या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सकेगा।

इस सत्र में पेश हो सकता है धर्मांतरण संशोधन विधेयक

20 मार्च तक चलने वाले विधानसभा सत्र में धर्मांतरण संशोधन विधेयक भी सदन में पेश हो सकता है। 10 मार्च को हुई कैबिनेट बैठक में इस विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर विवाद न बढ़े, इसके लिए सरकार ने एक ड्राफ्ट तैयार किया है।

इस ड्राफ्ट के अनुसार किसी एक धर्म से दूसरे धर्म में जाना आसान नहीं होगा। धर्म परिवर्तन केवल पूरी प्रक्रिया और नियम कानून का पालन करने के बाद ही किया जा सकेगा।

नियमों का उल्लंघन करने या जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर जेल के साथ कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में क्यों है कानून की जरूरत

छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में खासकर बस्तर, जशपुर और रायगढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आदिवासियों को ईसाई धर्म में शामिल किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। यह लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है। बस्तर के नारायणपुर क्षेत्र में तो यह विवाद कई बार गुटीय संघर्ष में भी बदल चुका है।

सरकार का मानना है कि इस तरह के विवादों को रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट कानून की जरूरत है।

धर्मांतरण की प्रक्रिया को मान्यता देने वाला कोई स्पष्ट नियम नहीं

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में धर्मांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता देने वाला कोई स्पष्ट नियम नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि लोग किसी अन्य धर्म के अनुयायी की बातों या प्रभाव में आकर उस धर्म को अपनाते हैं और उसकी पूजा-पद्धतियों को मानकर खुद को उस धर्म का अनुयायी घोषित कर देते हैं।

प्रस्तावित कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति इस नियम के बाहर जाकर धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे वैध नहीं माना जाएगा। साथ ही यदि किसी व्यक्ति पर दबाव बनाकर या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल गृह विभाग अन्य राज्यों में लागू ऐसे कानूनों का अध्ययन कर रहा है, ताकि छत्तीसगढ़ में भी एक स्पष्ट और मजबूत नियम तैयार किया जा सके।

आदिवासी और धर्म परिवर्तन करने वाले आदिवासियों के बीच कई बार गंभीर विवाद हो चुका है और कई मामलों में कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ चुकी है। इसी कारण छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसे विवादों को टालने और धर्मांतरण को लेकर स्पष्ट कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।


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