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अफीम की खेती मामले में बड़ा खुलासा : सिंचाई के लिए चोरी-छिपे उपयोग किया जाता था शिवनाथ नदी का पानी

 


Durg district के समोदा गांव में भाजपा नेता के फार्म हाउस में मिली करीब 8 करोड़ रुपए की अफीम के मामले में अब लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच के दौरान यह जानकारी मिली है कि अफीम की खेती की सिंचाई के लिए पानी भी चोरी किया जा रहा था। इसके लिए Shivnath River से मोटर पंप के जरिए पानी खींचकर खेतों तक पहुंचाया जाता था।

इधर पुलिस की कार्रवाई सोमवार को भी जारी रही। जेसीबी की मदद से अफीम के पौधों को उखाड़ा गया और करीब 6 हजार किलो पौधों को जब्त किया गया है। फिलहाल पौधों को मौके पर ही सुरक्षित रखकर सील कर दिया गया है।

पूछताछ में सामने आ रही नई जानकारियां

इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी Vinayak Tamrakar सहित अन्य लोगों से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस अवैध कारोबार के तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि Mandsaur अफीम का एक बड़ा हब माना जाता है, जहां से अफीम की सप्लाई Punjab, Haryana और Rajasthan जैसे राज्यों में की जाती है। बताया जा रहा है कि समोदा से कंटेनरों में भरकर रात के अंधेरे में अफीम को Kawardha के रास्ते सीमा पार कराया जाता था और फिर इसे मंदसौर तक पहुंचाया जाता था।

इस पूरे नेटवर्क को गुप्त रखने के लिए खेत के आसपास आम लोगों के आने-जाने पर भी रोक लगा दी गई थी। ताकि किसी को इस अवैध गतिविधि की जानकारी न मिल सके।

150 मजदूरों को लगाया गया काम पर

समोदा में अफीम के पौधों को उखाड़ने का काम रविवार और सोमवार सुबह से ही शुरू कर दिया गया था। शुरुआत में मजदूरों और कुछ नए आरक्षकों को इस काम में लगाया गया। अफीम के पौधों को जड़ से निकालने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई।

इस काम के लिए करीब 150 मजदूरों को लगाया गया था। इसके अलावा जेसीबी मशीनों की भी मदद ली गई। मजदूर पहले मिट्टी हटाते थे और फिर पौधों को अलग-अलग करके इकट्ठा करते थे।

जब्त किए गए अफीम के पौधों को अलग-अलग स्थानों पर एकत्र कर रखा गया है। पुलिस द्वारा आवश्यक अनुमति मिलने के बाद इन्हें नष्ट किया जाएगा। इसके लिए कुछ विभागों से भी अनुमति लेना जरूरी होता है। अनुमति मिलने के बाद इन पौधों को Bhilai Steel Plant या किसी अन्य फैक्ट्री के फर्नेस में जलाकर नष्ट किया जा सकता है।

मामले की जांच जारी

इस मामले को लेकर Sukhnandan Rathore (दुर्ग एएसपी) ने बताया कि आरोपियों की पुलिस रिमांड मंगलवार को खत्म होने वाली है। जरूरत पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच अभी जारी है और आसपास की जमीनों की ड्रोन के जरिए भी जांच कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही इस मामले में और स्पष्ट जानकारी सामने आ पाएगी।

फार्म हाउस की आड़ में चल रहा था पूरा खेल

गांव के लोगों के अनुसार आरोपी विनायक तासकर के खेत के आसपास बिना अनुमति के किसी का गुजरना भी मुश्किल था। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय कंटेनर वहां आया करते थे, लेकिन विनायक के डर के कारण कोई भी इस मामले को उजागर करने की हिम्मत नहीं करता था।

मामले के भंडाफोड़ के बाद गांव और आसपास के इलाकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो पाएगी।

ग्रामीण त्रिलोचन निषाद के अनुसार खेत में एक फार्म हाउस बनाया गया था और उसके चारों ओर गेट लगाए गए थे। आम लोगों का वहां प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था। इसी फार्म हाउस की आड़ में अफीम की खेती और अवैध कारोबार किया जा रहा था।

शिवनाथ नदी से की जा रही थी पानी चोरी

समोदा में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का यह कारोबार भाजपा नेता विनायक तासकर द्वारा किया जाता रहा है। झेंडारी गांव में स्थित खेतों में लगाए गए अफीम के पौधों की सिंचाई के लिए शिवनाथ नदी से चोरी-छिपे पानी लिया जाता था।

इसके लिए बिना किसी अनुमति के नदी से मोटर पंप जोड़कर खेतों तक पानी पहुंचाया जाता था। इस मामले में जल संसाधन विभाग को भी प्रतिवेदन भेजने की तैयारी की जा रही है।

बताया जा रहा है कि झेंडारी गांव में राजस्थान से कुछ मजदूरों को बुलाकर अफीम की खेती कराई जाती थी। राजस्थान के मजदूरों को अफीम की खेती का अनुभव होने के कारण उनसे यह काम कराया जाता था।

इस मामले में एक आरोपी अचलाराम जाट और श्रवण अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है।


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