प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ आंदोलन
12 मार्च /कोंडागांव / केशकाल।
कोंडागांव जिले के केशकाल क्षेत्र में लंबे समय से जारी लो-वोल्टेज की समस्या से परेशान किसानों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। गुरुवार को सैकड़ों किसान एकजुट होकर केशकाल पहुंचे और बस स्टैंड क्षेत्र में प्रदर्शन करते हुए कुछ समय के लिए जाम की स्थिति पैदा कर दी। किसानों के इस आंदोलन से इलाके में हलचल का माहौल बन गया और कुछ समय तक आवागमन भी प्रभावित रहा।
दरअसल, केशकाल विधानसभा क्षेत्र के बोरगांव, धनोरा, बड़े राजपुर सहित आसपास के कई गांवों में लंबे समय से लो-वोल्टेज की गंभीर समस्या बनी हुई है। किसानों का कहना है कि बिजली की कम वोल्टेज के कारण खेती की सिंचाई के लिए मोटर पंप ठीक से नहीं चल पा रहे हैं, जिससे उनकी फसल प्रभावित हो रही है और भारी नुकसान की आशंका बनी हुई है।
किसानों ने इस समस्या को लेकर 10 मार्च 2026 को विद्युत विभाग को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की थी, लेकिन निर्धारित समय के भीतर समस्या का समाधान नहीं होने से किसानों में नाराज़गी बढ़ती चली गई।
इसी के चलते 12 मार्च को करीब 300 से अधिक किसान बोरगांव के रावणभाठा मैदान में एकत्रित हुए और बैठक के बाद बिजली समस्या के समाधान की मांग को लेकर विद्युत मंडल केशकाल का घेराव करने के लिए रैली के रूप में रवाना हुए।
जब किसानों का जत्था केशकाल बस स्टैंड पहुंचा, तो वहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। किसानों और कांग्रेस नेताओं ने बस स्टैंड में रुककर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से रखा। इसी दौरान कुछ समय के लिए बस स्टैंड क्षेत्र में जाम की स्थिति बन गई।
स्थिति को देखते हुए केशकाल पुलिस, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर स्थिति को नियंत्रित किया गया। इसके बाद प्रशासन और विद्युत विभाग के अधिकारियों ने किसानों से चर्चा की और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया कि 11 फीडरों के माध्यम से प्रतिदिन 6 से 8 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल अपना आंदोलन समाप्त कर दिया और बस स्टैंड से जाम हटा दिया।
हालांकि किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन क्षेत्र के किसानों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि बिजली समस्या से उन्हें वास्तविक राहत कब मिलती है।
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