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‘महतारी गौरव वर्ष’: महिला सशक्तिकरण के नवयुग की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

 



08 मार्च मुंगेली/कोशलभूमि न्यूज
रायपुर, 07 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह पहल केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि मातृशक्ति को राज्य की विकास यात्रा के केंद्र में स्थापित करने का व्यापक संकल्प है। राज्य सरकार का मानना है कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त हों। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू किया जा रहा है।

विश्वास से निर्माण और अब गौरव की ओर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल को चरणबद्ध रूप से विकास और जनविश्वास से जोड़ने का प्रयास किया है। सरकार ने अपने पहले वर्ष को विश्वास वर्ष के रूप में मनाया, जिसका उद्देश्य शासन-प्रशासन और आम जनता के बीच भरोसे को मजबूत करना था। इसके बाद दूसरे वर्ष को पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनाया गया। इस वर्ष में अधोसंरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देने पर विशेष जोर दिया गया।

अब तीसरे वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है, जो प्रदेश की माताओं और बहनों को समर्पित है। इस वर्ष राज्य सरकार की अधिकांश योजनाओं का केंद्रबिंदु महिलाओं को बनाया गया है। यह पहल राज्य की समावेशी विकास नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

महतारी वंदन योजना: आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत आधारशिला

छत्तीसगढ़ सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक महतारी वंदन योजना आज महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जा रही है। अब तक इस योजना के माध्यम से 15 हजार 595 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए महिलाओं को दी जा चुकी है। हाल ही में योजना की 24वीं किस्त के रूप में 68 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में लगभग 641 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई। यह नियमित आर्थिक सहयोग महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कई महिलाएं इस राशि का उपयोग केवल घरेलू खर्चों तक सीमित न रखकर छोटे व्यवसाय, स्वरोजगार और बचत के लिए भी कर रही हैं।

संघर्ष से स्वावलंबन तक: रोहनी पटेल की प्रेरक कहानी

बालोद जिले के ग्राम खैरडीह की श्रीमती रोहनी पटेल की कहानी इस योजना के प्रभाव को दर्शाती है। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर आ गई थी। घर में वृद्ध सास की देखभाल और कॉलेज में पढ़ रहे दो बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई थी। ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। योजना से मिलने वाली राशि को उन्होंने सावधानीपूर्वक बचत कर अपने खेत में सब्जी उत्पादन का कार्य शुरू किया।

उन्होंने बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री की व्यवस्था कर मेहनत से खेती की। आज वे अपने खेत में उगाई गई ताजी सब्जियों को स्थानीय बाजारों में बेचकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनके बच्चों की पढ़ाई भी निर्बाध रूप से जारी है।

उनकी यह सफलता गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।


बिहान से बदली जिंदगी: लखपति दीदी बनीं माहेश्वरी यादव

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम कोरदा की श्रीमती माहेश्वरी यादव की कहानी भी महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण है। पहले उनका जीवन एक सामान्य गृहिणी की तरह घर-परिवार तक सीमित था। लेकिन जब वे छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना से जुड़ीं, तो उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। समूह के सहयोग और परिवार के समर्थन से उन्होंने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की। अपनी मेहनत और बेहतर प्रबंधन के कारण यह दुकान धीरे-धीरे गांव के लोगों के लिए भरोसेमंद केंद्र बन गई।

आज उनकी दुकान से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये की आय हो रही है। इसी वजह से उन्हें ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान मिली है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बच्चों की शिक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।



आधुनिक तकनीक से नई पहचान: ‘ड्रोन दीदी’ सीमा वर्मा

महिला सशक्तिकरण केवल पारंपरिक व्यवसायों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाएं आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रही हैं। बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र की सुश्री सीमा वर्मा इसका उदाहरण हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पहले मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। बाद में उन्होंने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। सरकार की सहायता से उन्हें ड्रोन सेट, जनरेटर और ई-वाहन उपलब्ध कराया गया। आज सीमा वर्मा किसानों के खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं। इस कार्य से उन्हें सम्मानजनक आय प्राप्त हो रही है।

गांव के लोग उन्हें स्नेहपूर्वक ड्रोन दीदी के नाम से जानते हैं।

बजट में महिला कल्याण को प्राथमिकता

राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 8 हजार 245 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

इसके अंतर्गत

👉आंगनबाड़ी और पोषण योजनाओं के लिए 2,320 करोड़ रुपये

👉प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये

👉मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये

👉रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपये

का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा 750 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये और 250 महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह बजटीय प्रावधान महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।



सुरक्षा और सम्मान की मजबूत व्यवस्था

महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी राज्य सरकार ने प्रभावी तंत्र विकसित किया है।👉वन स्टॉप सेंटर

👉181 महिला हेल्पलाइन

👉डायल 112

जैसी सेवाओं के माध्यम से संकट की स्थिति में महिलाओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा सुखद सहारा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

स्वावलंबन से नेतृत्व की ओर

प्रदेश में 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों को रियायती ऋण प्रदान किया गया है। इससे महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। रेडी-टू-ईट कार्य महिला समूहों को सौंपे जाने से उन्हें स्थायी आय का स्रोत मिला है। इसके साथ ही डिजिटल सखी, दीदी ई-रिक्शा, सिलाई मशीन सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना और लखपति दीदी जैसी पहलें महिलाओं को नए रोजगार अवसर प्रदान कर रही हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के अनुसार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सुरक्षित व सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विकसित छत्तीसगढ़ की सशक्त आधारशिला

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के माध्यम से राज्य को समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस विजन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य तत्व माना गया है।

‘महतारी गौरव वर्ष’ केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का व्यापक अभियान है। यह पहल मातृशक्ति के सम्मान, आत्मविश्वास और नेतृत्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास है।

आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भरता, नवाचार और नेतृत्व के साथ विकास की नई कहानी लिख रही हैं। यही सशक्त मातृशक्ति आने वाले समय में समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत आधारशिला बनेगी।


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