Breaking
AdSense का जो verification code लगाया है, उसे साइट से हटाना नहीं है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत को स्वायत्त निर्णय लेने होंगे: CDS जनरल अनिल चौहान
BREAKING

बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत को स्वायत्त निर्णय लेने होंगे: CDS जनरल अनिल चौहान

 सीडीएस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का स्वरूप अब बहुध्रुवीय हो चुका है।

नई दिल्लीवैश्विक राजनीति और सुरक्षा परिदृश्य में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच भारत को अपनी रणनीति स्वतंत्र रूप से तय करनी होगी। यह बात अनिल चौहान ने एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज की दुनिया में पारंपरिक अर्थों में मित्र और शत्रु की पहचान करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है, ऐसे में भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने होंगे।

बदल रहा है वैश्विक शक्ति संतुलन-

सीडीएस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का स्वरूप अब बहुध्रुवीय हो चुका है। कई देशों के बीच गठबंधन अस्थायी और परिस्थितिनिर्भर होते जा रहे हैं। आर्थिक हित, तकनीकी साझेदारी और सामरिक समझौते लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में किसी एक देश को स्थायी मित्र या स्थायी विरोधी मानना व्यवहारिक नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा नीति और कूटनीतिक रणनीति को समयानुकूल ढालना होगा। बदलते हालात में आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और त्वरित निर्णय प्रणाली बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

राष्ट्रीय हित सर्वोपरि -

जनरल चौहान ने जोर देकर कहा कि भारत की विदेश और रक्षा नीति का केंद्र बिंदु राष्ट्रीय हित होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और आर्थिक प्रगति की रक्षा करना है। इसके लिए हमें परिस्थितियों के अनुसार लचीला लेकिन दृढ़ रुख अपनाना होगा।”

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य के संघर्ष केवल पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष क्षेत्र, सूचना युद्ध और आर्थिक प्रतिबंध जैसे नए आयाम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

आत्मनिर्भर रक्षा ढांचे पर बल

सीडीएस ने कहा कि भारत को रक्षा उत्पादन और तकनीकी विकास में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाने होंगे। स्वदेशी हथियार प्रणालियों, अत्याधुनिक तकनीक और संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए निरंतर सुधार किए जा रहे हैं। एकीकृत कमान संरचना और संसाधनों के साझा उपयोग से भारत की सैन्य क्षमता और अधिक प्रभावी होगी।

पूर्वोत्तर और समुद्री क्षेत्र पर विशेष ध्यान -

जनरल चौहान ने कहा कि भारत के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र और समुद्री सीमाएँ रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास और सैन्य उपस्थिति को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा रणनीति को और सुदृढ़ करना होगा।

संतुलित कूटनीति की आवश्यकता -

सीडीएस ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति संतुलन और संवाद पर आधारित है। भारत विभिन्न वैश्विक मंचों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।

उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में किसी एक ध्रुव के साथ पूरी तरह खड़े होने के बजाय बहुपक्षीय सहयोग और रणनीतिक स्वायत्तता ही आगे का रास्ता है।

                                निष्कर्ष 

जनरल अनिल चौहान का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं और कई क्षेत्रों में अस्थिरता देखी जा रही है। उनके वक्तव्य से स्पष्ट है कि भारत आने वाले समय में अपनी सुरक्षा और कूटनीतिक नीति को अधिक स्वतंत्र और राष्ट्रीय हित केंद्रित दृष्टिकोण से संचालित करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दृष्टिकोण भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत, आत्मविश्वासी और संतुलित शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ