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युवा किसान ने पारंपरिक धान छोड़कर विकसित किया सब्जी आधारित नवाचार मॉडल

 



16 फरवरी 2026 

सारंगढ़-बिलाईगढ़ (गोमर्डा अभयारण्य):

सिर्फ 19 साल की उम्र में ही अनिल पटेल ने अपने गाँव रामटेक में पारंपरिक धान की खेती से हटकर सब्जी आधारित उन्नत कृषि मॉडल तैयार कर क्षेत्र के किसानों के लिए मिसाल कायम कर दी है। तीन साल पहले एक एकड़ में शुरू हुए उनके प्रयोग ने अब पाँच एकड़ में विस्तार पा लिया है और रोजाना 10 लोगों को रोजगार देने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है।

अनूठा कृषि प्रयोग

अनिल ने अपने खेती के मॉडल में सबसे पहले ध्यान दिया फसल चयन, जल प्रबंधन और तकनीक पर। आमतौर पर रेतीली मिट्टी में उगाई जाने वाली तरबूज की फसल उन्होंने सामान्य भूमि पर ड्रिप-मल्चिंग तकनीक अपनाकर उगाई। इसके अलावा, उन्होंने ग्राफ्टेड बैंगन, अदरक, मिर्च और खीरे की खेती करके न केवल उत्पादन बढ़ाया बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर की।

तीन वर्ष पहले अनिल ने एक एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से प्रयोग शुरू किया, जो सफल रहा। इसके दूसरे वर्ष उन्होंने अदरक, बैंगन, मिर्च और खीरे की खेती की। लगातार सफलताओं के बाद उन्होंने इस साल सब्जियों का रकबा बढ़ाकर पांच एकड़ कर दिया है। इस क्षेत्र में तीन एकड़ में ड्रिप-मल्चिंग तकनीक से मिर्च, एक एकड़ में खीरा और एक एकड़ में तरबूज की खेती की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने एक एकड़ में पॉलीहाउस भी स्थापित किया है। इस सीजन अब तक 180 क्विंटल मिर्च की बिक्री हो चुकी है।

आय और रोजगार में वृद्धि

अनिल के अनुसार, तीन वर्षों में उनकी आय 15 लाख रुपए तक पहुँच गई है। साथ ही तालाब में मत्स्य पालन करके उन्होंने 40 हजार रुपए अतिरिक्त आय भी अर्जित की। खेती के विस्तार के कारण रोजाना 10 लोगों को रोजगार मिलने लगा है।

तकनीक और नवाचार का असर

अनिल ने बताया कि ड्रिप-मल्चिंग तकनीक से खाद और पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचता है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार हुआ है। साथ ही, ग्राम रामटेक अभयारण्य क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहाँ प्राकृतिक नमी बनी रहती है, जिससे सामान्य जमीन में भी तरबूज और अन्य सब्जियाँ उगाना संभव हुआ।

अनिल की उपज कोलकाता, सिलीगुड़ी, हावड़ा और ओडिशा के कटक, भुवनेश्वर सहित कई शहरों में सप्लाई की जा रही है। व्यापारी खेत से ही तौलकर माल ले जाते हैं, जिससे बाजार तक ताज़ा उपज पहुँच रही है।

👉अनिल का संदेश

अनिल कहते हैं, “कृषि में बदलाव और नवाचार ही भविष्य है। मेहनत ज्यादा है, लेकिन आधुनिक तकनीक और सही बाजार मिलने से आय कई गुना बढ़ सकती है।” उनका यह प्रयास दिखाता है कि युवा किसानों में नई सोच और आधुनिक तकनीक को अपनाकर पारंपरिक खेती के मॉडल को बदलने की क्षमता मौजूद है।

अनिल पटेल का यह नवाचार मॉडल न केवल उनके गाँव के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।




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