रायपुर/21फरवरी 2026
प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज ने राज्यसभा की रिक्त हो रही सीटों में से एक पर समाज के योग्य व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने की मांग को लेकर राज्य सरकार तथा प्रमुख राजनीतिक दलों के संगठन प्रमुखों को पत्र भेजा है। संगठन ने इस मांग को सामाजिक प्रतिनिधित्व और जनसंख्या के अनुपात के आधार पर उचित बताया है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटें रिक्त हो रही हैं, जिनके लिए चुनाव की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। ऐसे में यह उपयुक्त अवसर है कि राज्य के बड़े सामाजिक वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। समाज का कहना है कि प्रदेश में सतनामी समाज की जनसंख्या लगभग 50 लाख से अधिक है, इसलिए राज्यसभा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व का हवाला
संगठन ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि अविभाजित मध्यप्रदेश के समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र में बिलासपुर और सारंगढ़ लोकसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थीं, जिनमें सतनामी समाज के प्रतिनिधियों को संसद में जाने का अवसर मिलता रहा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद भी समाज के डॉ. भूषण लाल जांगड़े भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में लोकसभा की केवल एक सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। ऐसे में समाज का तर्क है कि उच्च सदन यानी राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक संतुलन स्थापित किया जा सकता है।
जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व की मांग
प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज ने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी वर्गों को उनकी जनसंख्या और योगदान के आधार पर उचित भागीदारी मिलनी चाहिए। संगठन ने मांग की है कि राज्यसभा की एक सीट छत्तीसगढ़ कोटे से सतनामी समाज के किसी योग्य, शिक्षित और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति को दी जाए, जिससे समाज की आवाज राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाई जा सके।
संगठन ने समाज के आध्यात्मिक और सामाजिक इतिहास का भी उल्लेख किया। समाज के प्रमुख आराध्य Guru Ghasidas ने “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश देकर सामाजिक समानता और मानवता की अलख जगाई। उनके विचारों ने छत्तीसगढ़ के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत किया है।
समाज का गौरवशाली योगदान
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के निर्माण में सतनामी समाज के अनेक नेताओं और संतों का योगदान रहा है। धर्मगुरु अगमदास, मिनीमाता तथा डॉ. रेशम लाल जांगड़े संसद सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा दादा नकुलदेव ढीढ़ी छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के प्रथम जेल यात्री रहे, वहीं स्वतंत्रता सेनानी महंत नैनदास महिलांग सामाजिक सुधार और गौ-सेवा के कार्यों के लिए जाने जाते हैं।
संगठन का कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राज्य निर्माण और सांस्कृतिक विकास तक सतनामी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए उच्च सदन में प्रतिनिधित्व उनका अधिकार है।
दोनों प्रमुख दलों से अपील
प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज ने राज्य के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष Raman Singh सहित भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व से अपील की है कि वे समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा के लिए उम्मीदवार चयन में उचित निर्णय लें।
संगठन ने कहा है कि यदि समाज के किसी योग्य व्यक्ति को राज्यसभा भेजा जाता है तो यह न केवल सतनामी समाज बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी राजनीतिक दल सामाजिक संतुलन और समावेशी विकास की भावना को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेंगे।
संगठन ने अंत में कहा कि सतनामी समाज सदैव लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के पक्ष में रहा है तथा भविष्य में भी राज्य और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।



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