नेता प्रतिपक्ष ने उठाया मुद्दा, पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस
मामला दुर्ग जिले के समोदा गांव से जुड़ा है, जहां एक भाजपा नेता के खेत में कथित रूप से अफीम की खेती पकड़े जाने की खबर सामने आई है। इसी मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष ने रखा स्थगन प्रस्ताव
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Charandas Mahant ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए स्थगन प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या एक खेत का नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।
स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि इस मामले में आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि यदि किसी भी व्यक्ति की जमीन पर अवैध रूप से अफीम की खेती की जाती है, तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने सदन में कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में अफीम की खेती कैसे हो रही थी और प्रशासन को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में धान की खेती को बढ़ावा देने की बात कही जाती है, लेकिन जिस तरह से अफीम की खेती का मामला सामने आया है, उससे सरकार की नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि सरकार कहीं छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” बनाने के बजाय “अफीम का कटोरा” बनाने की दिशा में तो नहीं बढ़ रही है।
उनका कहना था कि अगर किसी प्रभावशाली व्यक्ति की जमीन पर इस तरह की अवैध खेती पकड़ी जाती है और उस पर तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो इससे प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
जांच की मांग
इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच या तो केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए या फिर विधायकों की एक समिति बनाकर पूरे मामले की जांच की जाए।
उनका कहना था कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।
सत्ता पक्ष का पलटवार
विपक्ष के आरोपों के बाद सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी जवाब देना शुरू किया। इस दौरान भाजपा विधायक Ajay Chandrakar ने कांग्रेस पर ही आरोप लगा दिया कि प्रदेश में अफीम की खेती की शुरुआत कांग्रेस सरकार के समय में हुई थी।
उन्होंने कहा कि विपक्ष बिना तथ्य के सरकार पर आरोप लगा रहा है और यह पूरी तरह से राजनीतिक बयानबाजी है।
उनका कहना था कि अगर इस तरह की कोई अवैध गतिविधि सामने आई है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।
सदन में बढ़ा विवाद
भाजपा विधायक के बयान के बाद विपक्ष के कई विधायक नाराज हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मामले को गंभीरता से लेने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझ रही है।
इसके बाद सदन में कुछ समय के लिए माहौल काफी गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
पूर्व मुख्यमंत्री का बयान
इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति की जमीन पर अफीम की खेती पकड़ी गई है, उसके नौकर को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन के एक अधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि जमीन उसी व्यक्ति की है, इसलिए उसे मुख्य आरोपी माना जाना चाहिए।
उनका आरोप था कि इस मामले में वास्तविक आरोपी को बचाने की कोशिश की जा रही है और जांच की दिशा को बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
गृह विभाग पर उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले में जिस तरह से कार्रवाई की जा रही है, उससे ऐसा लगता है कि आरोपी को संरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जमीन किसी व्यक्ति की है और वहां अवैध खेती पकड़ी गई है तो जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
काम रोककर चर्चा की मांग
विपक्ष के विधायकों ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए सदन के सभी काम रोककर इस पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।
उनका कहना था कि अफीम की खेती सिर्फ एक अपराध नहीं बल्कि समाज और युवाओं के लिए भी बड़ा खतरा है। इसलिए इस विषय पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।
विपक्ष का कहना था कि यदि विधानसभा में इस तरह के मुद्दों पर खुलकर चर्चा नहीं होगी तो जनता के सामने सच्चाई कैसे आएगी।
अफीम की खेती क्यों है गंभीर मामला
विशेषज्ञों के अनुसार अफीम की खेती एक संवेदनशील और नियंत्रित गतिविधि है। भारत में इसकी खेती सरकार की अनुमति के बिना करना पूरी तरह अवैध है।
यदि कहीं अवैध रूप से अफीम की खेती की जाती है तो इसे नशे के अवैध कारोबार से जोड़कर भी देखा जाता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां विशेष सतर्कता बरतती हैं।
राजनीतिक माहौल गरमाया
अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा आगे भी गरमाता रह सकता है।
आगे क्या होगा
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। यदि जांच के आदेश दिए जाते हैं तो यह मामला और भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
वहीं विपक्ष भी इस मामले को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने की रणनीति अपना सकता है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ विधानसभा में उठा अफीम की खेती का मुद्दा फिलहाल राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्ष जहां सरकार पर आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इन आरोपों को खारिज कर रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद इस मामले में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या वास्तव में इसमें किसी तरह की प्रशासनिक लापरवाही या संरक्षण की बात साबित होती है।
फिलहाल इतना जरूर है कि विधानसभा में उठा यह मुद्दा आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति में चर्चा का विषय बना रहेगा।
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