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दूरस्थ वनांचल में आयोग का दौरा, फोस्टर केयर बच्चों से की मुलाकात

 

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों ने जताई सेना में जाने की इच्छा


जगदलपुर, 24 फरवरी। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने जगदलपुर प्रवास के दौरान फोस्टर केयर व्यवस्था का मैदानी निरीक्षण किया। उन्होंने दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रह रहे बच्चों और फोस्टर परिवारों से मिलकर उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, दिनचर्या और भविष्य की आकांक्षाओं पर चर्चा की।

डॉ. शर्मा ने कहा कि जिन बच्चों को पारिवारिक कारणों से अपने माता-पिता से अलग रहना पड़ता है, उनके लिए संस्थागत देखरेख के बजाय सुरक्षित पारिवारिक वातावरण अधिक उपयुक्त विकल्प है। फोस्टर केयर व्यवस्था के माध्यम से बच्चों को घर जैसा माहौल, देखभाल और समुचित शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

निरीक्षण के दौरान बाबूसेरा और कलचा जैसे दूरस्थ गांवों में फोस्टर परिवारों से संवाद किया गया। समीक्षा में पाया गया कि बच्चों को परिवार में समुचित देखभाल मिल रही है और वे पढ़ाई तथा अन्य गतिविधियों में सक्रिय हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र के तीन बालकों ने भविष्य में सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने की इच्छा व्यक्त की। वहीं एक बालिका, जो पूर्व में बालिका गृह में रह चुकी थी, वर्तमान में फोस्टर परिवार के साथ रह रही है और स्थानीय भाषाएं सीखने के साथ पढ़ाई में भी रुचि ले रही है।

अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि फोस्टर केयर की प्रक्रिया बच्चों के शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखकर की जाए, ताकि पढ़ाई में व्यवधान न आए। इस संबंध में आयोग द्वारा आगे आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

जगदलपुर में अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में खेल सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत संरचना को बेहतर बनाने पर चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

आयोग ने स्पष्ट किया कि फोस्टर केयर व्यवस्था को और प्रभावी एवं संवेदनशील बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे, ताकि हर बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्नेहपूर्ण वातावरण मिल सके।

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