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डिप्टी कलेक्टर निलंबित: महिला आरक्षक ने लगाए यौन शोषण, जबरन गर्भपात और लाखों की धोखाधड़ी के आरोप

 

     डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके    

बालोद/बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके को गंभीर आरोपों के बाद राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बालोद जिले की एक महिला आरक्षक द्वारा लगाए गए यौन शोषण, जबरन गर्भपात और आर्थिक धोखाधड़ी के आरोपों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

पीड़िता ने मुख्य सचिव को साक्ष्यों सहित 12 बिंदुओं में विस्तृत शिकायत भेजी थी। शिकायत में वर्ष 2017 से 2025 के बीच हुए घटनाक्रम का क्रमवार उल्लेख किया गया है। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए शासन ने निलंबन आदेश जारी किया और संबंधित अधिकारी का मुख्यालय संभागीय आयुक्त कार्यालय, बस्तर नियत किया गया है।

परिचय से आरोपों तक का सफर

शिकायत के अनुसार, वर्ष 2017 में बालोद जिले के डौंडी क्षेत्र में पढ़ाई के दौरान दोनों की पहचान हुई थी। उस समय आरोपी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। महिला, जो उसी वर्ष पुलिस आरक्षक के रूप में नियुक्त हुई थी, ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने शादी का वादा कर उससे संबंध बनाए।

पीड़िता का दावा है कि उसने आरोपी की पढ़ाई और कोचिंग के लिए आर्थिक सहयोग भी किया। वह हर महीने चार से पांच हजार रुपये भेजती रही। वर्ष 2020 में आरोपी का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ, जिसके बाद कथित रूप से उसके व्यवहार में बदलाव आया।

जबरन गर्भपात के गंभीर आरोप

महिला आरक्षक ने अपनी शिकायत में कहा है कि 2017 से 2025 के बीच तीन बार जबरन गर्भपात कराया गया। आरोप है कि शादी का आश्वासन देकर संबंध बनाए गए और गर्भधारण होने पर दबाव बनाकर गर्भपात कराया गया। यह आरोप मामले को और अधिक संवेदनशील बनाता है।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

लाखों रुपये के लेन-देन का आरोप

शिकायत में आर्थिक धोखाधड़ी का भी उल्लेख है। महिला का आरोप है कि उसने बैंक से ऋण लेकर लगभग तीन लाख तीस हजार रुपये आरोपी के खाते में हस्तांतरित किए। इसके अलावा, नियमित रूप से आर्थिक सहयोग भी करती रही।

पीड़िता का कहना है कि उसे शादी का भरोसा दिलाया जाता रहा, लेकिन बाद में संबंधों से मुकरने की कोशिश की गई।

पदस्थापना के दौरान भी शोषण का आरोप

महिला ने आरोप लगाया है कि बीजापुर में पदस्थापना के दौरान जनवरी से मई 2025 के बीच भी शारीरिक शोषण जारी रहा। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब उसने विरोध किया तो उसे मानसिक दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा।

प्रशासनिक तंत्र पर उठे सवाल

मामले में केवल आरोपी अधिकारी ही नहीं, बल्कि बीजापुर जिला प्रशासन पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में आरोप है कि आरोपी को बचाने के लिए नियमों के विरुद्ध अवकाश स्वीकृत किया गया और कुछ दस्तावेजों में अनियमितताएं की गईं।

हालांकि, इन आरोपों की भी जांच की जा रही है। शासन स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस और विभागीय जांच शुरू

बालोद जिले के डौंडी थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। साथ ही, विभागीय स्तर पर भी जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक कोई भी अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सभी पक्षों को सुनने के बाद तथ्य सामने लाए जाएंगे।

प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव

यह मामला प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही और आचरण से जुड़े प्रश्न भी खड़े करता है। एक वरिष्ठ पद पर आसीन अधिकारी पर लगे आरोपों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

महिला संगठनों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है। वहीं, कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।


फिलहाल, निलंबन के बाद मामला जांच के अधीन है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषी पाए जाने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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