सक्ती जिले में 21 करोड़ का धान घोटाला उजागर
तीन संग्रहण केंद्रों से 66,680 क्विंटल धान गायब,जांच शुरू
सक्ती। सक्ती जिला में वर्ष 2024-25 के धान खरीदी सत्र से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। जिले के तीन धान संग्रहण केंद्र—सक्ती, डभरा और बोड़ासागर—से कुल 66,680 क्विंटल धान का अंतर पाया गया है। इस कथित गड़बड़ी की अनुमानित कीमत लगभग 21 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मामले के उजागर होते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन तीनों संग्रहण केंद्रों में कुल 1,70,743 मीट्रिक टन धान का संग्रहण किया गया था। धान के उठाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो 66,680 क्विंटल धान का अंतर सामने आया। इतने बड़े पैमाने पर धान की कमी मिलने से शासन को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
जिला विपणन अधिकारी शोभना तिवारी ने बताया कि संग्रहित धान लगभग एक वर्ष तक केंद्रों में रखा गया था। अब भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों के मिलान में 66,668 क्विंटल का अंतर सामने आया है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर सूखत या अन्य कारणों से अंतर कैसे आया, इसकी जांच की जा रही है। संबंधित संग्रहण केंद्र प्रभारियों के खिलाफ जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इधर मामले को लेकर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था और रिकॉर्ड संधारण प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कहीं यह लापरवाही का परिणाम है या फिर किसी संगठित मिलीभगत का मामला। जिले में इस प्रकरण को लेकर जनप्रतिनिधियों और किसानों में आक्रोश देखा जा रहा है।
जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू ने कहा कि एक किलो धान की कमी भी स्वीकार्य नहीं है, जबकि यहां हजारों क्विंटल धान का अंतर सामने आया है। उन्होंने शासन-प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला अब जिला ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। सभी की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर धान का अंतर कैसे हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

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