बलौदा बाजार/रायपुर। सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का संदेश लेकर निकली 140 किलोमीटर लंबी विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा का तृतीय दिवस ऐतिहासिक उत्साह और जनसमर्थन के बीच संपन्न हुआ। रायपुर से पवित्र तीर्थ गिरौदपुरी धाम तक निकाली जा रही यह पदयात्रा शुक्रवार को बलौदा बाजार जिले में प्रवेश कर गई, जहां सीमा क्षेत्र खरतोरा–संडी में श्रद्धालुओं ने गुरु खुशवंत साहेब और पदयात्रियों का पुष्पवर्षा, जयघोष और पारंपरिक स्वागत के साथ अभिनंदन किया।
यह पदयात्रा महान संत गुरु घासीदास बाबा के पावन आशीर्वाद तथा राजगुरु-धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब के सानिध्य में आयोजित की जा रही है। “बोल रहा अब हिंदुस्तान, मनखे–मनखे एक समान” के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा, जिसने सामाजिक एकता और समान अधिकारों के संदेश को नई ऊर्जा प्रदान की।
भंडारपुरी धाम से हुआ तृतीय दिवस का शुभारंभ
तृतीय दिवस की शुरुआत प्रातःकाल भंडारपुरी धाम में गुरुगद्दी की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने सामूहिक प्रार्थना कर समाज में सत्य, अहिंसा और समानता की भावना को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। राजमाता-गुरुमाता प्रवीण माता जी एवं ज्येष्ठ भ्राता सोमेश बाबा जी के आशीर्वाद से पदयात्रा को नई प्रेरणा और आध्यात्मिक बल मिला।
पूजा-अर्चना के पश्चात पदयात्री अनुशासित पंक्तियों में आगे बढ़े। मार्ग में विभिन्न गांवों और कस्बों में स्थानीय नागरिकों ने जलपान, फल वितरण और विश्राम की व्यवस्था कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
सांक रंगों से सजी पदयात्रास्कृति
पदयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का भी प्रतीक बन गई है। सुसज्जित पंथी दलों की मनोहारी प्रस्तुतियां, अखाड़ा दलों का शौर्य प्रदर्शन, ढोल-नगाड़ों की ताल और भक्ति गीतों की स्वर लहरियों ने पूरे मार्ग को उत्सवमय बना दिया। युवा वर्ग में विशेष उत्साह देखने को मिला, वहीं मातृशक्ति की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सामाजिक समरसता पर आधारित नाट्य और लोकगीतों ने संदेश दिया कि समाज में ऊंच-नीच और भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। “मनखे–मनखे एक समान” का उद्घोष हर पड़ाव पर गूंजता रहा।
केवल यात्रा नहीं, सामाजिक जागरण का अभियान
आयोजकों के अनुसार यह पदयात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि जनजागरण और सामाजिक परिवर्तन का अभियान है। इसका उद्देश्य बाबा जी के सत्य, अहिंसा, समानता और मानवता के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है।
समाज के प्रबुद्धजनों का कहना है कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता को सशक्त करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। व्यापक जनसमर्थन यह दर्शाता है कि यह आंदोलन अब केवल एक समाज तक सीमित नहीं, बल्कि सर्वसमाज की भागीदारी से आगे बढ़ रहा है।
प्रशासन की व्यापक व्यवस्थाएं
पदयात्रा के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। पुलिस बल मार्ग पर तैनात है, ताकि यातायात व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीम, चिकित्सा दल और एंबुलेंस सेवाएं यात्रा के साथ निरंतर चल रही हैं। जगह-जगह प्राथमिक उपचार केंद्र भी बनाए गए हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध हो सके।
गिरौदपुरी धाम की ओर बढ़ते कदम
140 किलोमीटर की यह पदयात्रा क्रमशः अपने अंतिम पड़ाव गिरौदपुरी धाम की ओर अग्रसर है। श्रद्धालुओं में अंतिम दर्शन और सामूहिक प्रार्थना को लेकर विशेष उत्साह है। आयोजन समिति के अनुसार आगामी दिनों में भी विभिन्न स्थानों पर स्वागत और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
यह पदयात्रा एक बार फिर यह संदेश दे रही है कि जब समाज एकजुट होकर समानता और सद्भाव का संकल्प लेता है, तो वह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक सशक्त कदम बन जाता है।

%202025.jpg%20(1).jpeg)
0 टिप्पणियाँ