Breaking
AdSense का जो verification code लगाया है, उसे साइट से हटाना नहीं है। बिल पास करने के बदले रिश्वत मांगने वाला श्रम निरीक्षक बर्खास्त
BREAKING

बिल पास करने के बदले रिश्वत मांगने वाला श्रम निरीक्षक बर्खास्त

 

कोर्ट से 3 साल की सजा के बाद राज्य सरकार की बड़ी कार्रवाई

               प्रतिकात्मक चित्र              

रायपुर एक शिक्षण संस्थान का लंबित बिल पास करने के एवज में रिश्वत मांगने और लेते हुए पकड़े गए श्रम निरीक्षक को राज्य सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। संबंधित कर्मचारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत न्यायालय से तीन वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा मिल चुकी है। न्यायालय के निर्णय के बाद शासन ने यह कार्रवाई की।

2019 का है मामला

जानकारी के अनुसार, सुरेश कुर्रे उस समय श्रम आयुक्त संगठन के अंतर्गत कार्यालय श्रम पदाधिकारी, जिला कोण्डागांव में श्रम निरीक्षक के पद पर पदस्थ थे। वर्ष 2019 में एक एनजीओ द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रम का लगभग 6 लाख 30 हजार रुपये का बिल लंबित था। आरोप है कि इस बिल को पास करने के लिए उन्होंने 1 लाख 90 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

एंटी करप्शन ब्यूरो ने रंगे हाथों पकड़ा

शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने योजना बनाकर कार्रवाई की। 14 अक्टूबर 2019 को एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और सुरेश कुर्रे को 40 हजार रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

विशेष न्यायालय ने सुनाई सजा

मामला विशेष प्रकरण क्रमांक 01/2021 के रूप में न्यायालय में चला। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), जशपुर द्वारा 26 नवंबर 2025 को पारित निर्णय में सुरेश कुर्रे को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। न्यायालय ने माना कि यह गंभीर प्रकृति का अपराध है।

सेवा में बने रहना अशोभनीय

न्यायालय के निर्णय के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की समीक्षा की। जारी आदेश में कहा गया है कि जिस कृत्य के लिए कर्मचारी को दोषसिद्ध ठहराया गया है, वह शासकीय सेवा की गरिमा के प्रतिकूल है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 से संबंधित यह अपराध गंभीर श्रेणी में आता है और इसे तुच्छ नहीं माना जा सकता।

विभागीय जांच की आवश्यकता नहीं

शासनादेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियमों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि होने के बाद विस्तृत विभागीय जांच की आवश्यकता नहीं है। नियमों के तहत गंभीर कदाचार सिद्ध होने पर सीधे दीर्घ दंड अधिरोपित किया जा सकता है। इसी आधार पर सुरेश कुर्रे को श्रम निरीक्षक पद से पदच्युत (डिसमिस) कर दिया गया है।

भ्रष्टाचार पर सख्त संदेश

सरकार की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि शासकीय पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ लेने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे और सेवा में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ