मंत्री केदार कश्यप का दीपक बैज पर तीखा हमला, बोले– अभ्यर्थियों को गुमराह करने की हो रही राजनीति
1319 डी.एड. अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी, शेष 1302 पदों पर छठवें चरण की मांग तेज
रायपुर। सहायक शिक्षक सीधी भर्ती-2023 को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। भर्ती प्रक्रिया, न्यायालय के निर्देश, कटऑफ रैंक और रिक्त पदों को लेकर जहां अभ्यर्थियों में असंतोष है, वहीं सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर आंदोलित अभ्यर्थियों को भड़काया और गुमराह किया जा रहा है।
मंत्री कश्यप ने कहा कि राजधानी स्थित सेंट्रल जेल में आधी रात पहुंचकर सहानुभूति जताने का प्रयास राजनीतिक दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लिए गए निर्णयों के कारण ही डी.एड. अभ्यर्थियों के साथ अन्याय की स्थिति बनी। उनके अनुसार, प्राथमिक शालाओं में बी.एड. योग्यताधारियों को प्रवेश देने से डी.एड. डिप्लोमाधारकों के अवसर प्रभावित हुए थे। जब इस निर्णय के खिलाफ अभ्यर्थियों ने आंदोलन किया, तब संवाद स्थापित करने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराई गई, जिससे कई अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग गया।
न्यायालय के निर्देशों के बाद बदली नियुक्ति प्रक्रिया
मंत्री कश्यप ने भर्ती प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सहायक शिक्षक सीधी भर्ती-2023 के पांचवें चरण में न्यायालय के निर्देशों का पालन किया गया। माननीय न्यायालय के आदेश के अनुसार 2621 बी.एड. अर्हताधारी सहायक शिक्षकों की सेवा समाप्त किए जाने के बाद उनके स्थान पर डी.एड. अर्हताधारियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किया गया।
उन्होंने बताया कि शासन द्वारा 2621 पदों के स्थान पर 2615 अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर प्रदान किया गया। प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद 1319 अभ्यर्थी पात्र पाए गए और उन्हें विधिवत नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं। शेष 1302 पद रिक्त रह गए, जिनको लेकर अब मेरिट सूची में निचले क्रम पर रहे अभ्यर्थियों द्वारा छठवें चरण की सूची जारी करने की मांग की जा रही है।
कटऑफ रैंक और गुणवत्ता पर सरकार की चिंता
मंत्री कश्यप ने कहा कि पांचवें चरण में सामान्य वर्ग का कटऑफ रैंक 6666, अनुसूचित जाति का 10990, अनुसूचित जनजाति का 72852 और अन्य पिछड़ा वर्ग का 9193 तक गया। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि छठवें चरण की सूची जारी की जाती है, तो कटऑफ और नीचे जा सकता है— सामान्य वर्ग में संभावित रूप से 10324, अनुसूचित जाति में 12697, अनुसूचित जनजाति में 78002 तथा अन्य पिछड़ा वर्ग में 11499 तक।
उन्होंने कहा कि अत्यधिक निचले रैंक वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति से शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। सरकार का दायित्व केवल रिक्त पद भरना नहीं, बल्कि योग्य और सक्षम शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना है।
दो वर्ष बीतने के बाद नई परिस्थितियां
मंत्री कश्यप ने यह भी रेखांकित किया कि सीधी भर्ती परीक्षा आयोजित हुए दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान प्रदेश में हजारों नए अभ्यर्थी डी.एड. और अन्य आवश्यक अर्हताएं प्राप्त कर चुके हैं, जो नई भर्ती प्रक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में केवल पुरानी सूची के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाना न्यायोचित नहीं होगा।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में विभाग द्वारा 4708 शिक्षकीय पदों पर भर्ती की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। इनमें 2000 पद विशेष रूप से सहायक शिक्षकों के लिए निर्धारित हैं। सरकार का उद्देश्य नई भर्ती के माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों को अवसर देना और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी
मंत्री कश्यप ने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष मुद्दे को भड़काकर युवाओं में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है। सरकार न्यायालय के आदेशों और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप कार्य कर रही है।
दूसरी ओर, भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी रिक्त पदों को भरने और छठवें चरण की सूची जारी करने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका तर्क है कि जब पद स्वीकृत हैं और प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, तो रिक्त पदों को भरने में विलंब क्यों किया जा रहा है।
विद्यार्थियों के भविष्य पर केंद्रित निर्णय
मंत्री कश्यप ने अंत में कहा कि सरकार का मुख्य ध्येय शासकीय शालाओं में शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखना और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करना है। किसी भी निर्णय में इस पहलू को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पात्र अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करते हुए विधिसम्मत और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
सहायक शिक्षक भर्ती-2023 को लेकर अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार छठवें चरण को लेकर क्या निर्णय लेती है और नई भर्ती प्रक्रिया किस समय-सीमा में पूरी होती है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बहस और अभ्यर्थियों की उम्मीदों के केंद्र में बना हुआ है।
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