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राज्यसभा चुनाव 2026: अमरजीत भगत का बड़ा संकेत, सरगुजा-बस्तर संतुलन पर दिया जोर

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत

छत्तीसगढ़ की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के बयान ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने सीधे तौर पर दावेदारी पेश नहीं की, लेकिन अपने शब्दों के जरिए स्पष्ट संकेत दे दिए कि सरगुजा की भूमिका प्रदेश की सत्ता में हमेशा निर्णायक रही है।

भगत ने कहा कि सरगुजा जिसे समर्थन देता है, सरकार उसी की बनती है। उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने बस्तर और सरगुजा के बीच राजनीतिक संतुलन की बात कही और कहा कि प्रदेश की राजनीति में इन दोनों अंचलों का प्रभाव हमेशा अहम रहा है। इसलिए सरकार और पार्टी नेतृत्व को फैसला लेते समय इस संतुलन को ध्यान में रखना चाहिए। राज्यसभा सीट को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी दावेदारी नहीं जताई, लेकिन इतना जरूर कहा कि राजनीतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस पार्टी की पकड़ जमीनी स्तर पर मजबूत होगी, सत्ता भी उसी के पास रहेगी।

आदिवासी चेहरे को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा पर भगत ने कहा कि अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान का होगा। जो भी फैसला लिया जाएगा, उसे सभी स्वीकार करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी क्षेत्रीय समीकरण और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेगी। अमरजीत भगत ने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान समय में भाजपा कुछ क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस की स्थिति सरगुजा सहित कुछ इलाकों में कमजोर दिख रही है। उन्होंने संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जमीनी पकड़ बढ़ाने पर जोर दिया। उनके अनुसार, राजनीति में टिके रहने के लिए निरंतर मेहनत और रणनीतिक संतुलन आवश्यक है।

छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को मतदान होना है। इन सीटों पर वर्तमान सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद ये सीटें रिक्त हो जाएंगी। चुनाव कार्यक्रम के तहत 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होगी। 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 मार्च तक नाम वापसी की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। पूरी प्रक्रिया 20 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी।

देशभर में इस बार राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ की दो सीटें भी शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस किस चेहरे को मैदान में उतारती है और क्या वह बस्तर-सरगुजा के संतुलन को साधने की रणनीति अपनाती है। वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी, जो 2020 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए चुने गए थे, संसद में संवैधानिक और कानूनी मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच राज्यसभा चुनाव प्रदेश की राजनीति के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

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