विशेष संवाददाता | राजधानी
राज्य की बहुप्रतीक्षित राजस्व निरीक्षक (RI) भर्ती परीक्षा अब गंभीर विवादों के घेरे में है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र 100 से अधिक अभ्यर्थियों तक पहुंचा दिया गया था। इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए शहर के बाहरी इलाकों में स्थित एक फार्महाउस और दो होटलों को ‘सेफ जोन’ के रूप में इस्तेमाल किया गया।
जांच एजेंसियों द्वारा मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल चैट की पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अभ्यर्थियों और कथित सरगनाओं की लोकेशन परीक्षा से ठीक पहले एक ही स्थान पर पाई गई, जिससे पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
ऐसे रची गई पूरी साजिश
सूत्रों के अनुसार, परीक्षा से करीब 48 घंटे पहले संदिग्ध गतिविधियां शुरू हो गई थीं। विभिन्न जिलों से चयनित अभ्यर्थियों को निजी वाहनों और किराए की गाड़ियों से शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक फार्महाउस पर लाया गया।
फार्महाउस को ‘स्पेशल गाइडेंस कैंप’ का नाम दिया गया था। यहां अभ्यर्थियों को मोबाइल फोन जमा कराने और बाहरी संपर्क सीमित रखने के निर्देश दिए गए थे। बताया जा रहा है कि यहां देर रात तक कथित तौर पर प्रश्नपत्र के सवाल हल कराए गए।
जिन अभ्यर्थियों को फार्महाउस में जगह नहीं मिली, उन्हें पास के दो होटलों में ठहराया गया। होटल रजिस्टर की जांच में पाया गया कि कई कमरों की बुकिंग एक ही व्यक्ति या समूह के नाम पर की गई थी।
100 से अधिक अभ्यर्थियों तक पहुंचा पेपर
जांच एजेंसियों का अनुमान है कि प्रश्नपत्र कम से कम 100 अभ्यर्थियों तक पहुंचा। हालांकि यह संख्या और बढ़ सकती है। जब्त किए गए मोबाइल फोन और लैपटॉप से मिले डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच जारी है।
कुछ व्हाट्सऐप और टेलीग्राम चैट में प्रश्नों की तस्वीरें और हल साझा किए जाने के संकेत मिले हैं। कई चैट परीक्षा से एक रात पहले की बताई जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, प्रति अभ्यर्थी 10 से 20 लाख रुपये तक की डील की गई। कुछ मामलों में आंशिक भुगतान अग्रिम और शेष राशि चयन के बाद लेने की बात सामने आई है।
लोकेशन ट्रैकिंग से टूटा राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ अभ्यर्थियों के असामान्य रूप से उच्च अंक और एक जैसे उत्तर पैटर्न पर संदेह हुआ। शिकायत मिलने के बाद विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
डिजिटल फॉरेंसिक जांच में कई संदिग्ध मोबाइल नंबर चिन्हित किए गए। जब लोकेशन डाटा खंगाला गया तो पाया गया कि परीक्षा से एक दिन पहले कई अभ्यर्थी और कथित दलाल एक ही फार्महाउस परिसर में मौजूद थे।
इसके बाद पुलिस ने छापेमारी की, जहां से दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और संदिग्ध नोट्स बरामद किए गए। सीसीटीवी फुटेज में अभ्यर्थियों के समूहों को देर रात तक आते-जाते देखा गया है।
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| सहायक सांख्यिकी अधिकारी वीरेंद्र जाटव और हेमंत कुमार कौशिक को आरोपी बनाया गया है। |
अंदरूनी मिलीभगत की आशंका
जांच एजेंसियां अब इस एंगल पर भी काम कर रही हैं कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचा। क्या इसमें विभाग के अंदरूनी कर्मचारी शामिल थे? क्या प्रिंटिंग प्रेस या ट्रांसपोर्टेशन के दौरान सुरक्षा में सेंध लगी?
सूत्रों के अनुसार, कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। बैंक खातों और संपत्ति के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। यदि अंदरूनी मिलीभगत साबित होती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
गिरफ्तारियां और पूछताछ
अब तक कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें कथित बिचौलिये, कोचिंग से जुड़े लोग और कुछ अभ्यर्थी शामिल हैं। मुख्य सरगना की तलाश जारी है।
पुलिस का दावा है कि यह एक संगठित गिरोह है, जो पहले भी प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय रहा हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में सामने आए अन्य पेपर लीक मामलों की फाइलें भी खंगाली जा रही हैं।
सरकार सख्त, परीक्षा रद्द होने के संकेत
मामले के सामने आते ही सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। संबंधित विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का निर्णय लिया जा सकता है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और संपत्ति जब्ती जैसी सख्त कार्रवाई भी संभव है।
ईमानदार अभ्यर्थियों में रोष
इस खुलासे के बाद हजारों अभ्यर्थियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया। सोशल मीडिया पर भी परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई है।
कई अभ्यर्थियों ने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।
भर्ती प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल
राज्य में बीते कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाएं विवादों में रही हैं। ऐसे में RI भर्ती परीक्षा में सामने आया यह मामला भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्र की सुरक्षा के लिए डिजिटल एन्क्रिप्शन, अंतिम समय में पेपर जनरेशन और मल्टी-लेयर मॉनिटरिंग जैसे उपाय लागू किए जाने चाहिए।
आगे क्या?
फिलहाल जांच जारी है। डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, बैंकिंग ट्रेल और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की संभावना है।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह राज्य के इतिहास के सबसे बड़े भर्ती घोटालों में से एक माना जाएगा।


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