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हाईकोर्ट में छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की याचिका खारिज, कक्षा 5वीं–8वीं में एकीकृत परीक्षा पर लगी मुहर

सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त लगभग 6200 निजी स्कूलों में अब स्कूल शिक्षा विभाग कराएगा परीक्षा,पास–फेल व्यवस्था लागू

समाजसेवक विकास तिवारी

बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में कक्षा पांचवीं और आठवीं की एकीकृत परीक्षा को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही राज्य के लगभग 6200 सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में अब कक्षा 5वीं और 8वीं की परीक्षा स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में विद्यार्थियों को पास या फेल भी किया जाएगा।

यह मामला याचिका क्रमांक WPC 5926/2025 से जुड़ा था, जिसमें निजी स्कूल संगठन ने एकीकृत/बोर्ड परीक्षा का विरोध किया था। याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 16 और 30 का हवाला दिया था। उनका तर्क था कि प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक किसी छात्र को रोका या बोर्ड परीक्षा के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

हालांकि, सुनवाई के दौरान यह तर्क सामने रखा गया कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2024 में आरटीई अधिनियम की धारा 16 में संशोधन किया जा चुका है। 16 दिसंबर 2024 को जारी राजपत्र के अनुसार, राज्य बोर्ड, सीबीएसई या अन्य मान्यता प्राप्त बोर्ड से संबद्ध सरकारी एवं निजी विद्यालयों में कक्षा पांचवीं और आठवीं में प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के अंत में नियमित परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में असफल होने की स्थिति में छात्र को उसी कक्षा में रोका भी जा सकेगा।

सुनवाई के दौरान समाजसेवक विकास तिवारी ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर छात्रों और अभिभावकों के हितों का पक्ष रखा। उनका कहना था कि कुछ निजी स्कूल सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर अन्य बोर्डों का पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं और अभिभावकों से अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त कई निजी स्कूलों में निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण नहीं किया गया।

विकास तिवारी ने दावा किया कि आरटीई के तहत अध्ययनरत छात्रों को भी निर्धारित निःशुल्क पुस्तकों के स्थान पर महंगी निजी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया गया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। उन्होंने राज्य में बढ़ती ड्रॉपआउट दर पर भी चिंता जताई।

मामले की सुनवाई के बाद माननीय न्यायालय ने निजी स्कूल संगठन की याचिका खारिज कर दी और राज्य सरकार को परीक्षा आयोजित करने के निर्णय पर आगे बढ़ने की अनुमति दे दी।

विकास तिवारी ने बताया कि उन्होंने कुछ अधिकारियों और निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ पुलिस में शिकायत आवेदन भी प्रस्तुत किया है, जिसमें विभिन्न आरोपों की जांच की मांग की गई है।

हाईकोर्ट के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि राज्य में परीक्षा व्यवस्था के क्रियान्वयन और निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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