सीड फंड से लेकर IPR तक व्यापक सहायता,युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर कदम
छत्तीसगढ़ को पारंपरिक संसाधन-आधारित मॉडल से आगे बढ़ाकर ज्ञान और तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने के लिए सरकार ने 2030 तक 5,000 से अधिक नए पंजीकृत स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए वित्तीय संरचना, बाजार समर्थन, तकनीकी सहायता और प्रशासनिक सरलीकरण जैसे सभी पहलुओं को नीति में शामिल किया गया है।
राज्य में एक एकीकृत स्टार्टअप डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जो सिंगल विंडो सिस्टम की तरह कार्य करेगा। इससे उद्यमियों को निवेश प्रोत्साहन, इनक्यूबेटर, निवेशक, मेंटर और विभिन्न सरकारी सेवाओं तक एक ही स्थान से पहुंच मिलेगी।
150 करोड़ के दो मेगा फंड
नई स्टार्टअप नीति का सबसे मजबूत आधार इसका वित्तीय ढांचा है। सरकार ने कुल 150 करोड़ रुपये के दो प्रमुख फंड घोषित किए हैं—
1. ₹100 करोड़ का छत्तीसगढ़ स्टार्टअप (कैपिटल) फंड
यह फंड उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स में इक्विटी या वेंचर निवेश के रूप में पूंजी उपलब्ध कराएगा, जिससे तेजी से विकास करने वाले उद्यमों को मजबूत आधार मिलेगा।
2. ₹50 करोड़ का क्रेडिट रिस्क फंड
इस फंड के तहत पात्र स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक का कोलैटरल-फ्री ऋण दिलाने में सहायता की जाएगी। साथ ही पाँच वर्षों तक ब्याज का 75% (अधिकतम 50 लाख रुपये) तक अनुदान दिया जाएगा।
यह व्यवस्था उन युवाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्हें अब तक पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाता था।
‘स्टार्टअप नगर’ की परिकल्पना
नीति के अंतर्गत Startup Nagar विकसित करने की योजना भी शामिल है। इस एकीकृत नवाचार परिसर में इनक्यूबेटर्स, को-वर्किंग स्पेस, मेकरस्पेस, प्रयोगशालाएं, उत्कृष्टता केंद्र, निवेशक, बैंकिंग सुविधाएं, कॉन्फ्रेंस हॉल, ऑडिटोरियम, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे राज्य का स्टार्टअप इकोसिस्टम संगठित और सशक्त बनेगा।
सीड फंड, बाजार विस्तार और ब्रांडिंग सहायता
शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए सरकार ने सहायता को काफी बढ़ाया है—
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प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट और प्रोटोटाइप के लिए 10 लाख रुपये तक का सीड फंड
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राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एक्सपो/व्यापार मेलों में भागीदारी पर 50% व्यय अनुदान
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डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग खर्च की प्रतिपूर्ति
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सरकारी खरीद में प्राथमिकता
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3 वर्षों तक 50% किराया अनुदान (अधिकतम 15,000 रुपये प्रतिमाह)
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मशीनरी पर 35% (अधिकतम 35 लाख रुपये) अनुदान
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पेटेंट और प्रमाणन पर 75% (अधिकतम 10 लाख रुपये) तक प्रतिपूर्ति
IPR और तकनीकी नवाचार के लिए विशेष सेल
राज्य सरकार Intellectual Property & Technology Facilitation Cell की स्थापना करेगी। यह सेल स्टार्टअप्स को बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) संबंधी मार्गदर्शन देगा, तकनीकी नवाचारों के व्यावसायीकरण में सहायता करेगा और पेटेंट प्रक्रिया को सरल बनाएगा।
रोजगार सृजन और सामाजिक समावेशन
यह नीति केवल व्यवसाय विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक उद्देश्यों को भी प्राथमिकता देती है। यदि कोई स्टार्टअप कम से कम 10 स्थायी रोजगार सृजित करता है, तो—
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महिलाओं के लिए 6,000 रुपये प्रतिमाह वेतन सहायता
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पुरुषों के लिए 5,000 रुपये प्रतिमाह वेतन सहायता
दिव्यांगजन, नक्सल-प्रभावित परिवारों के सदस्य और सेवानिवृत्त अग्निवीरों के लिए पाँच वर्षों तक वेतन का 40% तक अनुदान दिया जाएगा।
STPI के साथ साझेदारी
तकनीकी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने Software Technology Parks of India (STPI) के साथ समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत AI, MedTech और स्मार्ट कृषि जैसे क्षेत्रों में विशेष सहयोग मिलेगा, जिससे राज्य के स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय नेटवर्क और उन्नत प्रयोगशालाओं तक पहुंच प्राप्त होगी।
स्टार्टअप क्रांति की शुरुआत
पूर्व में स्टार्टअप प्रोत्साहन सामान्य औद्योगिक नीति तक सीमित था, लेकिन नई नीति ने समर्पित वित्तीय रोडमैप, जोखिम पूंजी, IPR सुविधा और बाजार समर्थन जैसे प्रावधानों के साथ एक मजबूत और बहुआयामी स्टार्टअप इकोसिस्टम की नींव रखी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नीति का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो अगले पाँच वर्षों में छत्तीसगढ़ न केवल स्टार्टअप पंजीकरण और निवेश के मामले में आगे बढ़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान भी स्थापित करेगा। यह नीति राज्य के युवाओं के लिए अपने ही प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता की नई संस्कृति विकसित करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित हो सकती है।



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