3 मार्च को चंद्रग्रहण के कारण बदलेगी परंपरा,सूतक काल में रंग खेलना वर्जित
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 3 मार्च को भारतीय समयानुसार दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक चंद्रग्रहण रहेगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य होगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा। शास्त्रों के अनुसार चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक प्रारंभ हो जाता है। इस प्रकार 3 मार्च की सुबह लगभग 6:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा।
चंद्रोदय से पहले लगेगा ग्रहण
जानकारों का कहना है कि ग्रहण का आरंभ दोपहर में ही हो जाएगा, जबकि चंद्रोदय शाम करीब 5:59 बजे के आसपास होगा। ऐसे में भारत में ग्रहण का पूर्ण दृश्य रूप नहीं बल्कि मोक्ष काल अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। बावजूद इसके, ग्रहण काल और सूतक अवधि का धार्मिक महत्व बना रहेगा।
सूतक में मांगलिक कार्य वर्जित
महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार, शास्त्रों में ग्रहण और सूतक काल के दौरान मांगलिक कार्य, पूजा-अर्चना, उत्सव और रंग खेलना वर्जित माना गया है। इसी कारण 3 मार्च को रंग खेलने से परहेज किया जाएगा और 4 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा।
धार्मिक मान्यता है कि सूतक के दौरान भोजन पकाना, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्पर्श करना और शुभ कार्य करना उचित नहीं माना जाता। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और शुद्धिकरण की परंपरा निभाई जाती है।
कई देशों में दिखेगा चंद्रग्रहण
खगोलीय दृष्टि से वर्ष 2026 को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस वर्ष कुल चार ग्रहण लगेंगे—दो सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण। इनमें से एक सूर्यग्रहण फरवरी में हो चुका है। अगस्त में होने वाला सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन 3 मार्च का खग्रास चंद्रग्रहण भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत द्वीप समूह तथा उत्तर और दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा।
विरले ही बनती है ऐसी स्थिति
जानकारों का कहना है कि स्वतंत्रता के बाद संभवतः पहली बार ऐसी स्थिति बन रही है जब होलिका दहन के अगले दिन रंग नहीं खेला जाएगा, बल्कि एक दिन के अंतराल के बाद होली मनाई जाएगी। इससे त्योहार की तैयारियों और आयोजनों की तिथियों में भी बदलाव देखने को मिलेगा।
धार्मिक और खगोलीय कारणों से इस बार होली का उत्साह दो चरणों में बंटा रहेगा—2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों का पर्व। श्रद्धालु और नागरिक ग्रहण व सूतक के नियमों का पालन करते हुए पर्व मनाने की तैयारी में जुट गए हैं।

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