पलारी विकासखंड के ग्राम धमनी में वैष्णवी स्व सहायता समूह की महिलाओं ने ‘ग्रीन होली’ का दिया संदेश, तीन क्विंटल से अधिक हर्बल गुलाल तैयार
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| हर्बल गुलाल बनाते समूह की महिलायें |
01 मार्च/बलौदाबाजार ।
रंगों के पर्व होली की आहट के साथ जहां बाजार रंग-बिरंगे गुलाल और पिचकारियों से सजे हुए हैं, वहीं इस बार बलौदाबाजार जिले में होली का रंग कुछ खास नजर आ रहा है। यहां होली केवल खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का संदेश भी बनकर सामने आई है। जिले के पलारी विकासखंड के ग्राम धमनी में वैष्णवी स्व सहायता समूह की महिलाएं प्राकृतिक फूलों और हरी सब्जियों से हर्बल गुलाल तैयार कर ‘ग्रीन होली’ की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
होली की बयार चारों ओर बह रही है। बाजारों में रौनक है, लेकिन इस बार सबसे अधिक मांग हर्बल और प्राकृतिक गुलाल की देखी जा रही है। रासायनिक रंगों से त्वचा और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को देखते हुए लोग अब सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ग्राम धमनी की महिलाएं पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से रंग तैयार कर रही हैं।
फूलों और पत्तियों से बन रहे प्राकृतिक रंग
वैष्णवी स्व सहायता समूह की महिलाएं पलाश के फूलों से गुलाबी रंग, गेंदे के फूलों से पीला रंग, पालक से हरा रंग और लालभाजी से लाल रंग तैयार कर रही हैं। इन रंगों की खासियत यह है कि इनमें किसी भी प्रकार के रासायनिक तत्वों का उपयोग नहीं किया जाता।
गुलाल तैयार करने की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारंपरिक और सुरक्षित है। पहले फूलों और पत्तियों को एकत्र कर साफ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है। इसके बाद उन्हें तेज धूप में सुखाया जाता है ताकि उनमें नमी न रहे। सूखने के बाद इनका बारीक पाउडर बनाया जाता है। इस पाउडर में अरारोट मिलाकर मुलायम बनावट दी जाती है। खुशबू के लिए गुलाब जल और प्राकृतिक सुगंधित तेल मिलाया जाता है, जिससे गुलाल की महक भी आकर्षक बन जाती है। पूरी प्रक्रिया महिलाओं द्वारा हाथों से की जाती है, जिससे गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रखा जा सके।
तीन क्विंटल से अधिक हर्बल गुलाल तैयार
समूह की महिलाओं ने अब तक करीब तीन क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार कर लिया है। स्थानीय बाजारों में स्टॉल लगाकर इसकी बिक्री की जा रही है। लोगों का रुझान प्राकृतिक रंगों की ओर बढ़ रहा है, जिससे बिक्री में भी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है।
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| समूह द्वारा निर्मित गुलाल |
यह पहल महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन गई है। स्व सहायता समूह की यह गतिविधि उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित – दुर्गा ध्रुव
स्व सहायता समूह की अध्यक्ष दुर्गा ध्रुव बताती हैं, “हम पूरी तरह प्राकृतिक फूलों और पत्तियों से गुलाल बनाते हैं। इसमें कोई भी केमिकल नहीं होता, इसलिए यह त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। इससे हमें रोजगार भी मिल रहा है और लोग भी सुरक्षित रंगों का उपयोग कर पा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि इस बार होली पर लोग यदि प्राकृतिक रंग अपनाते हैं तो यह पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहतर होगा।
ग्रीन होली की ओर बढ़ते कदम
बलौदाबाजार जिले की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की भी सशक्त मिसाल है। ग्राम धमनी की महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग कर स्वरोजगार के नए अवसर बनाए जा सकते हैं।
इस होली यदि आप भी रंग खरीदने जा रहे हैं, तो इन महिलाओं के हाथों से बने प्राकृतिक हर्बल गुलाल को अपनाकर ‘ग्रीन होली’ मनाने में अपना योगदान दे सकते हैं। यह सिर्फ रंग नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश है।
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